स्वदेशी के संकल्प के साथ जनवरी 2028 में फिर सजेगा सांसद स्वदेशी इंडस्ट्रियल एक्सपो

 




उदयपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत', 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' के विजन को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय (आरसीए) के खेल मैदान में आयोजित चार दिवसीय 'सांसद स्वदेशी इंडस्ट्रियल एक्सपो — 2026' सोमवार को जनवरी—2028 में फिर मिलने के संकल्प के साथ विदा हुआ। सोमवार सायंकाल आयोजित समापन संवाद कार्यक्रम में एक्सपो के प्रणेता व मार्गदर्शक उदयपुर लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने 6-7-8-9 जनवरी 2028 को पुन: मिलने की घोषणा की। एक्सपो के संयोजक मनोज जोशी ने बताया कि मेवाड़ के औद्योगिक विकास में कई नवाचारों के दर्शन कराने वाले इस एक्सपो ने समापन समारोह को भी परम्परा से हटकर खुले औद्योगिक संवाद में तब्दील कर एक नई परम्परा का आयाम स्थापित कर दिया जिसने मंच और मंच के सामने की दूरियां घटकर सामूहिक सहभागिता का संदेश गुंजा दिया। समारोह का स्वरूप अतिथियों के उद्बोधन के बजाय खुली चर्चा का रहा जिसमें जनप्रतिनिधियों और मेवाड़ के उद्यमियों के बीच सशक्त बेबाक व्यापारिक संवाद हुआ। इस संवाद ने न केवल आयोजन को अद्वितीय और दूरगामी बनाया, बल्कि समस्याओं के समाधान और सुझावों को धरातल पर लाने की राह भी प्रशस्त हुई। समापन कार्यक्रम में सांसद डॉ. रावत सहित उपमहापौर दिनेश भट्ट, एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह, पायरोटेक ग्रुप के चेयरमैन प्रताप सिंह तलेसरा, राहुल इंजीनियरिंग के ललित पानेरी, भाजपा के पदाधिकारी जगदीश शर्मा, देवीलाल सालवी, सीमा चम्पावत मुख्य रूप से उपस्थित रहे। एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने आह्वान किया कि भविष्य कृषि का है और उद्यमी सीताफल व जामुन जैसे स्थानीय उत्पादों की वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में आगे आएं। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से पूर्ण तकनीकी सहयोग, प्रोजेक्ट गाइडेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देने की प्रतिबद्धता जताई। उपमहापौर दिनेश भट्ट ने कहा कि प्राप्त सुझावों और समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम और प्रशासन उद्योगों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। समापन संवाद में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने 'विकसित भारत 2047' के विजन के साथ 'विकसित मेवाड़' की परिकल्पना को साकार करने का आह्वान किया। उन्होंने उदयपुर और पूरे मेवाड़ संभाग के सर्वांगीण औद्योगिक, पर्यटन और कृषि विकास के लिए व्यावहारिक नीतियों एवं जनआंदोलन की आवश्यकता जताई। दार्जिलिंग के 'थ्री-टी' मॉडल (टूरिज्म, टी, टिम्बर) का उदाहरण देते हुए सांसद डॉ. रावत ने कहा कि मेवाड़ की अपार संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अब नीतियों के क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि शहर में रिंग रोड (कोरिडोर) के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलना और एलिवेटेड रोड जैसे प्रोजेक्ट्स मेवाड़ के बदलते स्वरूप का प्रमाण हैं। सांसद डॉ. रावत ने क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुख बिंदु सामने रखे। इनमें पर्यटन व रोजगार के क्षेत्र में जयसमंद झील के 30 किमी घेरे में एग्रो, विलेज और ट्राइबल टूरिज्म को बढ़ावा देकर 5,000 युवाओं को रोजगार से जोड़ना, महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में राजीविका की 200 प्रशिक्षित दीदियों को हस्तशिल्प और बड़े मॉल प्रोजेक्ट्स से जोड़ना, कृषि एवं निर्यात के क्षेत्र में श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन का दायरा बढ़ाकर 150 से अधिक उत्पाद तैयार करना और ब्लू इकोनॉमी (सी-फूड/जलीय संसाधन) में निर्यात की संभावनाएं तलाशना, पर्यावरण व विरासत के क्षेत्र में बाहरी बिल्डरों द्वारा पहाड़ियों के दोहन पर चिंता जताते हुए ईको-फ्रेंडली निर्माण और अरावली संरक्षण पर जोर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावी बनाने तथा क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को लेकर जल्द ही केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव, राज्यवर्धन सिंह राठौर और संस्कृति मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।समापन संवाद के दौरान जयंत ओझा ने प्रमुखता से बात रखते हुए सवाल उठाया कि उदयपुर से भारी मात्रा में रॉ-मटेरियल बाहर सप्लाई होता है, तो फिर यहीं बड़ी इंडस्ट्रियल इकाइयां क्यों स्थापित नहीं हो सकतीं? उन्होंने प्राइवेट इंडस्ट्रियल एरिया और सब्सिडी युक्त जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। आयुष दुबे ने शहर में पावर सप्लाई और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर तकनीकी विचार रखे। हितेश भोई ने सोलर इंडस्ट्री में नॉन-डीसीआर पैनल और आरएसईबी की असमान नीतियों का मुद्दा उठाकर राज्य में एकीकृत नीति बनाने का आग्रह किया। वहीं, एक्सपो संयोजक मनोज जोशी ने उद्योग स्थापना में आ रही देरी को खत्म करने के लिए व्यावहारिक 'सिंगल विंडो सिस्टम' लागू करने का जोरदार समर्थन किया।इससे पूर्व, एक्सपो में वर्ल्ड आर्किटेक्चर डे पर सोमवार दोपहर ‘विरासत भी, विकास भी’ विषय पर आयोजित संवाद में सिविल एवं इंटीरियर डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर तथा वास्तु शास्त्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में विरासत संरक्षण, अनुशासित नवनिर्माण, पर्यावरण व अरावली संरक्षण, वास्तु शास्त्र और शहरी विकास के संतुलन पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि हमारा शहर एक जीवंत इकाई है। प्राचीन आहड़ सभ्यता और अजंता-एलोरा की गुफाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हमारे प्राचीन स्थापत्य में कला, उपयोगिता और संदेश का अद्भुत समन्वय रहा है। उन्होंने निर्माण में वास्तु, लोक परंपराओं और गुणवत्ता के साथ पर्यावरण संरक्षण को आवश्यक बताया। अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टीम के संदर्भ में नागरिकों की सजगता की सराहना करते हुए उन्होंने आह्वान किया कि प्लास्टिक के बजाय स्टील और मिट्टी की बोतलों का उपयोग कर पारंपरिक जीवनशैली को बढ़ावा दिया जाए। अंत में कमलेश शर्मा ने मेले को प्लास्टिक मुक्त बनाने की पहल की जानकारी दी।कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कमलेश शर्मा ने निर्माण एक्सपो की यात्रा पर प्रकाश डाला। मनोज जोशी ने एक्सपो के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए अनुशासित नवनिर्माण से ही सुरक्षित व व्यवस्थित भवन निर्माण संभव है। संवाद सत्र में आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने सरकारी योजनाओं व कार्यालयों में आर्किटेक्ट्स को स्पष्ट पहचान और उचित स्थान देने की मांग रखी। श्रीमती मीता रहना ने नीदरलैंड का उदाहरण देते हुए भवनों की ऊंचाई के अनुशासन और अवैध खनन पर अंकुश लगाने पर जोर दिया। अंजू पामेचा ने कृषि भूमि संरक्षण, जबकि शिखा पुरोहित ने ऐतिहासिक विरासतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की नैतिक जिम्मेदारी बताई। गौरव सिंह ने अरावली संरक्षण को प्राथमिकता देने और कैलाश सोनी ने प्रदूषण नियंत्रण व दीर्घकालिक प्लानिंग की आवश्यकता जताई। वास्तु शास्त्री केशुलाल ने जीवन में सुख-समृद्धि के लिए वास्तु के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके अलावा हरीश पोखरना, राकेश सामर और मिनल जैन ने भी विचार व्यक्त किए।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता