सुनील कोठारी के सिर सजा जयपुर महापौर का ताज

 








जयपुर, 25 सितंबर (हि.स.)। जयपुर नगर निगम को शुक्रवार को नया महापौर मिल गया। भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता मावर को पीछे छोड़ते हुए महापौर पद हासिल किया। कोठारी को 89 वोट, मावर को 60 वोट मिले, जबकि एक वोट नोटा में गया। सभी 150 पार्षदों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

चुनाव परिणाम के बाद कोठारी ने कहा कि यह वृहद जयपुर का पहला बोर्ड है। निगम का दायरा बढ़ने के साथ नए क्षेत्र भी जुड़े हैं, इसलिए पुराने और नए दोनों जयपुर में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना प्राथमिकता रहेगी। सड़क, सफाई, सीवरेज और लाइटिंग जैसी व्यवस्थाओं के बेहतर रखरखाव के साथ नए क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा।

नवनिर्वाचित महापौर सुनील कोठारी ने शुक्रवार शाम 5.15 बजे विधिवत पदभार ग्रहण किया। इससे पहले उन्होंने मोतीडूंगरी गणेशजी और आराध्य गोविंददेवजी को नमन किया। पदभार ग्रहण कार्यक्रम में जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा, राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन अरुण चतुर्वेदी, विधायक कालीचरण सराफ, विधायक बालमुकुंदाचार्य, भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर सहित भाजपा के कई पदाधिकारी, पार्षद और समर्थक मौजूद रहे।

कोठारी ने कहा कि जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय ने जिस गौरव के साथ की थी, उस विरासत को आधुनिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ाना जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकसित जयपुर की कल्पना सभी 150 पार्षदों के सहयोग से पूरी होगी। कांग्रेस पार्षद हों या निर्दलीय, सभी को साथ लेकर शहर के विकास के लिए काम किया जाएगा।

कोठारी ने कहा कि शुरुआती एक महीने में जयपुर को स्वच्छ बनाने और सड़कों को सुगम करने पर विशेष ध्यान रहेगा। शहरवासियों से उन्होंने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर अनावश्यक सामान नहीं रखने की अपील की। उधड़ी सड़कों और उन पर खर्च हुए करोड़ों रुपए के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। काम में कमी कहां रही और उसे किस तरह बेहतर किया जा सकता है, इसका आकलन कर आगे कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर राज्य और केंद्र सरकार से अतिरिक्त संसाधन लेने का प्रयास किया जाएगा।

अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कुछ मामलों को समझाइश से सुलझाया जा सकता है, जबकि जरूरत पड़ने पर सख्ती भी की जाएगी। व्यापारियों और शहरवासियों से निर्धारित दायरे में प्रतिष्ठान और आवास रखने की अपील की।

महापौर ने जयपुर की ऐतिहासिक विरासत को लेकर अपनी इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहर की स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय और वास्तुविद विद्याधर भट्टाचार्य से जुड़ी है, लेकिन शहर में ऐसा प्रमुख स्थान नहीं है, जहां दोनों को साथ दर्शाया गया हो। उनकी इच्छा है कि किसी प्रमुख स्थान पर दोनों की तस्वीर, चित्र या प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि नई पीढ़ी जयपुर के इतिहास और स्थापत्य विरासत से परिचित हो सके।

कोठारी ने खुद को परकोटा क्षेत्र से निर्वाचित पार्षद बताते हुए कहा कि भले ही उनका आवास राजापार्क में है, लेकिन परकोटे की चिंता करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महापौर कार्यालय सभी के लिए खुला रहेगा और शहरवासी अपनी समस्याएं लेकर आ सकते हैं।

महापौर चुनाव में विपक्ष की ओर से लगाए गए सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों पर कोठारी ने कहा कि भाजपा ने किसी तरह का सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को जनता के विश्वास से बहुमत मिला और वे भी जनता के विश्वास से पार्षद बने हैं।

नोटा में पड़े एक वोट को लेकर कोठारी ने कहा कि संभव है यह किसी कांग्रेस पार्षद का वोट रहा हो और जयपुर को लेकर उसके मन में कोई विचार या असमंजस रहा हो। उन्होंने कहा कि आगे उस असमंजस को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मावर ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता बल और धनबल का इस्तेमाल किया। मावर ने दावा किया कि पार्षदों को करीब 15 दिन तक बाड़ेबंदी में रखा गया और पुलिस बल व धनबल के माध्यम से दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को मिला बहुमत वास्तव में हासिल नहीं हुआ, बल्कि उनसे छीना गया। ये आरोप कांग्रेस प्रत्याशी के हैं और भाजपा की ओर से कोठारी ने सत्ता के दुरुपयोग से इनकार किया है।

महापौर चुनाव के बाद अब निगम में डिप्टी मेयर के चुनाव पर नजर है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 26 सितंबर को डिप्टी मेयर पद के लिए नामांकन, मतदान और परिणाम की प्रक्रिया होगी।

भाजपा में डिप्टी मेयर के नाम को लेकर मंथन जारी है। महापौर पद पर परकोटा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व मिलने के बाद अब परकोटे के बाहर के क्षेत्र से चेहरे को मौका देने की चर्चा है। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ महिला और ओबीसी पार्षदों को प्रतिनिधित्व देने को लेकर भी पार्टी में चर्चा की बात सामने आई है। जयपुर नगर निगम के इतिहास में अब तक डिप्टी मेयर पद पर किसी महिला के निर्वाचित नहीं होने का मुद्दा भी चर्चा में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश