संकट में परिवार के साथ खड़ी रहेगी पुलिस: एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी
जयपुर, 30 जून (हि.स.)। पुलिस की वर्दी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रतीक नहीं है,बल्कि उसके पीछे ऐसे हजारों परिवारों का विश्वास,त्याग और धैर्य भी जुड़ा होता है। जो हर दिन अपने प्रियजन को समाज की सुरक्षा के लिए समर्पित करते हैं। ऐसे में यदि किसी पुलिसकर्मी के साथ कोई अप्रत्याशित घटना घट जाए तो सबसे बड़ा आघात उसके परिवार पर पड़ता है। इसी मानवीय संवेदना को केंद्र में रखते हुए सवाई माधोपुर की पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी ने पुलिस कल्याण की दिशा में एक ऐसी पहल की है। जो संवेदनशील पुलिसिंग का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। उनके नेतृत्व में शुरू किया गया 'अक्षय फंड' अब संकट की घड़ी में पुलिस परिवारों के लिए एक मजबूत आर्थिक संबल बनेगा।
पुलिस संगठन अपने कर्मियों को केवल सहकर्मी नहीं, बल्कि एक परिवार मानता है। इसी भावना को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'अक्षय फंड' की स्थापना की गई है। यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि पुलिसकर्मी चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, उनका परिवार कभी अकेला नहीं रहेगा।
एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने बताया कि हाल ही में सवाई माधोपुर पुलिस लाइन में कार्यरत कांस्टेबल कुंजीलाल के आकस्मिक निधन ने पूरे पुलिस परिवार को भावुक कर दिया। इस घटना ने यह आवश्यकता महसूस कराई कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था होनी चाहिए। इसी विचार ने 'अक्षय फंड' का स्वरूप लिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में लगभग 1400 पुलिसकर्मी कार्यरत है और अनुमानत: 16 लाख रुपया इस फंड में एकत्र हो सकता है।
एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की पहल पर सवाई माधोपुर जिला पुलिस के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के एक दिन के वेतन के स्वैच्छिक अंशदान से इस फंड का गठन किया जाएगा। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपने साथी और उसके परिवार के प्रति अपनत्व, उत्तरदायित्व और एकजुटता का जीवंत उदाहरण है।
'अक्षय फंड' के माध्यम से यदि किसी पुलिसकर्मी का आकस्मिक निधन होता है, तो उसके परिजनों को ₹3 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। यह सहायता शोकाकुल परिवार को कठिन समय में प्रारंभिक आर्थिक राहत प्रदान करेगी और उन्हें यह भरोसा दिलाएगी कि उनका पुलिस परिवार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यावहारिक और आत्मनिर्भर कार्यप्रणाली है। फंड बनने के बाद जब तक उसकी राशि सहायता के रूप में उपयोग नहीं हो जाती, तब तक किसी भी कार्मिक के वेतन से पुनः कटौती नहीं की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ही पुनः एक दिन के वेतन का स्वैच्छिक अंशदान लिया जाएगा। इससे योजना निरंतर चलती रहेगी और कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा।
'अक्षय फंड' पुलिस संगठन की उस कार्य संस्कृति का परिचायक है, जहाँ संवेदना और सहयोग केवल शब्द नहीं, बल्कि व्यवहार का हिस्सा हैं। यह पहल पुलिस कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और मानवीय मूल्यों का ऐसा संगम है, जो संगठन के भीतर आत्मविश्वास और पारस्परिक विश्वास को और अधिक मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश