सोमवती अमावस्या के साथ समाप्त हुआ मलमास: फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
जयपुर, 14 जून (हि.स.)। एक माह से धार्मिक कारणों के चलते थमे मांगलिक कार्यों का दौर अब पुनः शुरू हो गया है। सोमवार को सोमवती अमावस्या के शुभ संयोग के साथ पुरुषोत्तम मास (मलमास) का समापन हो रहा है। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार सहित अन्य शुभ कार्यों पर लगी रोक समाप्त हो जाएगी और प्रदेशभर में फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। बाजारों, विवाह स्थलों और समारोह स्थलों पर तैयारियां तेज हो गई हैं तथा लोगों में उत्साह का माहौल है। पंचांग के अनुसार सोमवार को प्रातः 8:26 बजे तक अमावस्या तिथि रहने से यह दिन सोमवती अमावस्या के रूप में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है।
पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्नान, दान-पुण्य, गौ सेवा तथा भगवान शिव का कच्चे दूध और काले तिल से अभिषेक करने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि सुहागिन महिलाओं को इस दिन शिव-पार्वती की पूजा कर पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करनी चाहिए। साथ ही अन्न, वस्त्र, फल, जल, छाता एवं पंखे जैसी उपयोगी वस्तुओं का दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पूजा-अर्चना का शुभ समय प्रातः 5:32 बजे से 7:58 बजे तक रहेगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार पुरुषोत्तम मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कार करना वर्जित माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु पूजा-पाठ, जप, तप और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। सोमवार को अधिकमास समाप्त होने के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी।
पं. शर्मा ने बताया कि अब विवाह सहित सभी शुभ कार्य पुनः प्रारंभ हो सकेंगे। आगामी दिनों में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है। विवाह स्थलों की बुकिंग, खरीदारी और अन्य तैयारियों को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। जून और जुलाई माह में विवाह के अनेक शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। जून माह में 19, 20, 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 29 जून को विवाह के शुभ योग बन रहे हैं। वहीं जुलाई में 1, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 12 और 22 जुलाई को विवाह समारोह संपन्न किए जा सकेंगे। मांगलिक कार्यों का यह दौर अधिक समय तक नहीं चलेगा। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों पर चार माह के लिए विराम लग जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु व्रत, उपवास, कथा-कीर्तन, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष रूप से भाग लेते हैं।
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही एक बार फिर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा। ऐसे में आगामी लगभग डेढ़ माह का समय विवाह और अन्य शुभ आयोजनों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश