कोबरा के साथ अस्पताल पहुंचा स्नेक कैचर, तुरंत शुरू किया इलाज
पाली, 09 जुलाई (हि.स.)। बांगड़ अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक स्नेक कैचर चार फीट लंबे जिंदा कोबरा को डिब्बे में बंद कर इलाज कराने पहुंच गया। डिब्बे के अंदर कोबरा लगातार फुफकार रहा था, जिसे देखकर अस्पताल का स्टाफ और मरीज घबरा गए। स्नेक कैचर ने डॉक्टरों से कहा कि 12 साल से सांप पकड़ रहा हूं, पहली बार सांप ने काटा है, मेरा इलाज कर दीजिए।
तखतगढ़ निवासी संजय वाल्मीकि (40) कोबरा के डसने के बाद उसे डिब्बे में बंद कर सीधे पाली के बांगड़ अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने तत्काल उनका उपचार शुरू किया और उन्हें अस्पताल के ओल्ड आईसीयू में भर्ती किया। समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है। संजय वाल्मीकि ने बताया कि वह पिछले 12-13 वर्षों से पाली, जालोर सहित आसपास के क्षेत्रों में सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। अब तक वह करीब 10 हजार सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ चुके हैं।
वे तखतगढ़ के चौधरियों के मोहल्ले में एक घर में घुसे कोबरा को पकड़ने के लिए पहुंचे थे। कोबरा पहले एक पाइप में छिपा था और बाद में पत्थर के नीचे जाकर बैठ गया। जब उन्होंने उसे पकड़कर डिब्बे में डालने का प्रयास किया तो कोबरा ने उनकी उंगली पर डस लिया। इसके बाद भी उन्होंने कोबरा को सुरक्षित डिब्बे में बंद किया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंच गए।
संजय के हाथ में बंद डिब्बे से कोबरा की फुफकार सुनकर अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्टाफ कुछ देर के लिए दहशत में आ गए। बाद में कोबरा को सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया और डॉक्टरों ने स्नेक कैचर का उपचार शुरू किया।
गुरुवार को पाली जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं को भी सांप ने काट लिया। पहली घटना पाली शहर की उम्मेद मिल की है, जहां न्यू शक्ति नगर निवासी मंजू (39) लंच करने के बाद चबूतरे पर बैठी थीं। इसी दौरान पास के गड्ढे में छिपे सांप ने उनके पैर पर डस लिया। साथी मजदूर उन्हें तुरंत बांगड़ अस्पताल लेकर पहुंचे।
दूसरी घटना बूसी गांव की है, जहां राधिका (21) रात में बिजली जाने के बाद बरामदे में सोने चली गईं। देर रात करीब दो बजे सोते समय सांप ने उनके पैर पर काट लिया। परिजनों ने उन्हें भी तत्काल बांगड़ अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित