राजस्थान की धरती में छिपा ‘स्ट्रेटेजिक खजाना’, बालोतरा का सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा देश की ताकत
जयपुर, 24 मई (हि.स.)। पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा जिला अब केवल रिफाइनरी परियोजना के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सामरिक और तकनीकी शक्ति के नए केंद्र के रूप में भी उभरने जा रहा है। जिले के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार मिलने से भारत को रक्षा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाईटेक इंडस्ट्री में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।
हाल ही में केन्द्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कम कॉस्ट कमिटीज की संयुक्त बैठक में सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में मौजूद रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (एचआरईई) और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के बड़े भंडार को चिन्हित किया गया। इन खनिजों के तकनीकी मूल्यांकन के लिए कॉम्प्लेक्स के तीन ब्लॉक्स का कार्य अलग-अलग कंपनियों को आवंटित कर दिया गया है।
बालोतरा जिले का सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स एक विशाल ज्वालामुखीय संरचना है, जो करीब 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण में यहां नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे बहुमूल्य रेयर अर्थ एलिमेंट्स मिलने की पुष्टि हुई है।
ये खनिज दुनिया की सबसे आधुनिक और संवेदनशील तकनीकों में उपयोग किए जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन तत्वों का उपयोग एयरोस्पेस इंजनों के लिए सुपरअलॉय मटेरियल बनाने, चिकित्सा उपकरणों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में काम आने वाले सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट तैयार करने में किया जाता है।
सिवाना में मिले दुर्लभ खनिजों का उपयोग परमाणु रिएक्टर, मिसाइल तकनीक, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक कार, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स और रासायनिक प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में होगा। ये खनिज आधुनिक बैटरियों, चिप निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन खनिजों की उपलब्धता भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिला सकती है। अभी दुनिया में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का बड़ा हिस्सा सीमित देशों के नियंत्रण में है। ऐसे में राजस्थान में इन खनिजों की खोज भारत की रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स को राज्य और देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपलब्धता राजस्थान को नई औद्योगिक पहचान दिला सकती है। मुख्यमंत्री ने परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा खान विभाग एवं संबंधित जिला प्रशासन को केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि सर्वेक्षण और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
राज्य सरकार दुर्लभ खनिजों के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “रेयर अर्थ एक्सीलेंस सेंटर” की स्थापना भी करने जा रही है। यह केंद्र रणनीतिक खनिजों पर रिसर्च, नई तकनीकों के विकास और औद्योगिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके लिए राजस्थान सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च, आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी आईएसएम धनबाद जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य कर रही है।
केन्द्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों की खोज इस मिशन का प्रमुख हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बालोतरा का सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स आने वाले समय में भारत को हरित ऊर्जा, हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित