सावन के पहले सोमवार शिवमय हुआ जयपुर

 








जयपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। सावन मास के पहले सोमवार पर राजधानी जयपुर सहित पूरे राजस्थान में भगवान शिव की भक्ति का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त से ही शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। शिवभक्तों ने जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद और पंचामृत से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगल की कामना की। मंदिरों में दिनभर 'हर-हर महादेव', 'बम-बम भोले' और 'ॐ नमः शिवाय' के जयघोष गूंजते रहे। छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध जयपुर पूरी तरह शिवमय नजर आया। ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, रोजगारेश्वर महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव, रंगीला महादेव और अन्य प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बड़ी संख्या में व्रत रखकर पूजा-अर्चना की, जबकि कई श्रद्धालु नंगे पांव मंदिरों तक पहुंचे।

रविवार देर रात से ही श्रद्धालु गलता तीर्थ पहुंचने लगे। पवित्र कुंड में स्नान कर हजारों श्रद्धालुओं ने कांवड़ में जल भरा और 'बोल बम' व 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ शहर के विभिन्न शिवालयों की ओर रवाना हुए। कांवड़ यात्रा में युवा, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। कई महिलाओं ने सिर पर कलश और कंधों पर कांवड़ लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। डाक कांवड़ लेकर दौड़ते युवाओं का उत्साह भी आकर्षण का केंद्र रहा।

चौड़ा रास्ता स्थित प्राचीन ताड़केश्वर महादेव मंदिर के पट सुबह 3:45 बजे खोले गए। सुबह 4 बजे उज्जैन महाकाल की तर्ज पर भस्म आरती हुई। मंदिर के पुजारी शक्ति व्यास और अमित व्यास ने बताया कि भगवान शिव का 51 किलो देसी गाय के घी तथा 151 किलो दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक किया गया। मंगला आरती के दौरान भगवान का दूल्हे के स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। शाम को भगवान जगन्नाथ की विशेष झांकी भी सजाई गई।

वैशाली नगर स्थित झारखंड महादेव मंदिर में सुबह 4:30 बजे मंगला आरती के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ। दर्शन के लिए मंदिर के बाहर डेढ़ से दो किलोमीटर तक लंबी कतार लगी रही और श्रद्धालुओं को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। मंदिर सचिव श्रीप्रकाश सोमानी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं। शाम को कोलकाता से मंगवाए गए फूलों से भगवान का फूल बंगला श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में 40 से अधिक सीसीटीवी कैमरे तथा 150 से 200 स्वयंसेवक व्यवस्था में तैनात रहे।

रोजगारेश्वर महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव और डूंगरी स्थित रंगीला महादेव मंदिर में भी दिनभर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, सहस्त्रघट अभिषेक, पंचामृत अभिषेक एवं महाआरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, पुष्प, धतूरा, केवड़ा और गंगाजल अर्पित कर परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। ताड़केश्वर महादेव मंदिर में देवी पूजक ढोल दल ने ढोल-मंजीरों और शंखनाद से भक्तिमय वातावरण बना दिया।

कांवड़ यात्रा और मंदिरों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के निर्देश पर प्रमुख मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर करीब 200 पुलिसकर्मी, छह मोबाइल पार्टियां तैनात की गईं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी गई। प्रमुख मंदिरों में बैरिकेडिंग, अलग प्रवेश-निकास मार्ग, पार्किंग, पेयजल, प्राथमिक उपचार और स्वयंसेवकों की विशेष व्यवस्था की गई।

ताड़केश्वर महादेव मंदिर के महंत अमित कुमार व्यास ने बताया कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर पवित्र जल अर्पित किया था। उसी परंपरा के रूप में सावन में कांवड़ का जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

वहीं पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सावन सोमवार पर शिव पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत और जलाभिषेक से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि कालसर्प योग के निवारण के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

जयपुर के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बड़े शहरों तक शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया। कई स्थानों पर शिव बारात, भजन संध्या, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक आयोजनों का आयोजन हुआ। पूरे प्रदेश में सावन के पहले सोमवार पर शिवभक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश