गहलोत का सरकार पर हमला: एसीबी की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

 


जयपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आईएएस शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद प्रकरण में एसीबी की जांच और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एसीबी महानिदेशक पर दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी, इस पर संदेह है। गहलोत शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

गहलोत ने कहा कि शिखर अग्रवाल को एपीओ करने और एसीबी में प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने से ही कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। अभी यह तय होना है कि मामले में एफआईआर दर्ज होगी या नहीं। उन्होंने कहा कि पूरे देश का मीडिया इस मामले को उठा रहा है, लेकिन जांच अभी पीई तक ही सीमित है। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच किस दिशा में जाएगी, यह भी देखने वाली बात होगी।

गहलोत ने आरोप लगाया कि एसीबी डीजी दबाव में हैं और विभाग में एडीजी स्तर की एक महिला अधिकारी का प्रभाव डीजी से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी अधिकारियों को डांटती-फटकारती हैं और जिन लोगों को निशाना बनाना होता है, उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। गहलोत ने कहा कि एसीबी डीजी को दबाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। उन्होंने महेश जोशी प्रकरण का उल्लेख करते हुए भी आरोप लगाया कि उस मामले में ऊपर से दबाव के चलते कार्रवाई प्रभावित हुई थी।

शिखर अग्रवाल के परिवार की ओर से एक ही कंपनी से करीब 40 विला-कॉटेज खरीदने के मामले पर गहलोत ने कीमतों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर 40 विला की संपत्ति करीब छह करोड़ रुपए में खरीदी गई और अब विक्रेता पक्ष के किसी व्यक्ति की ओर से एक विला की कीमत 15 लाख रुपए बताने की बात सामने आई है। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि यदि 15 लाख रुपए में विला मिल रहे हैं तो आम लोगों और पत्रकारों को भी ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से पत्रकारों को 75 लाख रुपए में फ्लैट देने की बात का हवाला देते हुए पूछा कि पत्रकारों के लिए कीमत 75 लाख और शिखर अग्रवाल के लिए विला 15 लाख रुपए में कैसे? उन्होंने सवाल किया कि क्या 15 लाख रुपए में विला देने की योजना केवल शिखर अग्रवाल के लिए बनाई गई थी। गहलोत ने मुख्यमंत्री से इस पर जवाब मांगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश