सेवा भारती प्राकृतिक आरोग्य केन्द्र का गुरुवार को पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी करेंगे लोकार्पण

 






उदयपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। महाराणा प्रताप की धरती पर सेवा भारती, उदयपुर के तत्वावधान में स्थापित प्राकृतिक आरोग्य केन्द्र का लोकार्पण गुरुवार को प्रातः 10:30 बजे हरिदास जी की मगरी, सुभाष चौराहा स्थित परिसर में किया जाएगा। लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी (भैयाजी) करेंगे।

सेवा भारती चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष विवेक बोहरा ने बताया कि लोकार्पण समारोह के पश्चात केन्द्र के समीप केटीएस वाटिका में सभा का भी आयोजन होगा। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में सुरेश जोशी (भैयाजी) का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। समारोह के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा रहेंगे, जबकि पैसिफिक मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल और धरोहर चेरिटेबल फाउंडेशन के निदेशक संजय सिंघल विशिष्ट अतिथि होंगे। लोकार्पण समारोह में ही सेवा भारतीय चिकित्सालय की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया जाएगा। बोहरा ने बताया कि बुधवार रात तक कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।

कार्यक्रम संयोजक प्रकाश सोनी ने बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति, प्राकृतिक चिकित्सा और सेवा भावना को समर्पित इस केन्द्र में आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों के प्राकृतिक उपचार एवं स्वास्थ्य संवर्धन की समग्र सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। केन्द्र में सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी तथा 50 बैड की इनडोर सुविधा उपलब्ध रहेगी। यहां आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, प्राणायाम, जल एवं मिट्टी चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, एक्यूपंक्चर, कपिंग थेरेपी, शिरोधारा, जूस थेरेपी सहित आवश्यकता अनुसार एलोपैथी और दंत चिकित्सा की सेवाएं भी मिलेंगी। मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉयड, जोड़ों के रोग तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्राकृतिक प्रबंधन के लिए विशेष उपचार एवं व्यक्तिगत आहार-परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।

इस बीच, बुधवार को लोकार्पण के पूर्व दिवस पर सेवा भारती प्राकृतिक आरोग्य केन्द्र एवं जिज्ञासा आयाम उदयपुर महानगर के संयुक्त तत्वावधान में पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कुल 73 बच्चों का योग्य आयुर्वेद चिकित्सकों के मार्गदर्शन में स्वर्णप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया।

इस अवसर पर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने अभिभावकों को स्वर्णप्राशन संस्कार के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि आयुर्वेद में इसे बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास, पाचन शक्ति तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पारंपरिक स्वास्थ्य संवर्धन प्रक्रिया माना गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता