जैसलमेर में लोक मंथन यात्रा के तहत संगोष्ठी आयोजित

 




जैसलमेर, 03 सितंबर (हि.स.)। ‘हम भारत के लोग’—संविधान की प्रस्तावना के ये शब्द केवल औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और नागरिकों की सामूहिक शक्ति का परिचायक हैं। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के साथ समाज में बंधुत्व और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित होगी।

यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री ने माधव भवन, गांधी कॉलोनी में आयोजित लोक मंथन यात्रा की संगोष्ठी में कही। लोक मंथन आयोजन समिति जैसलमेर, आरएचआरडी फाउंडेशन और अधिवक्ता परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में करीब 150 प्रबुद्धजन, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

मुख्य वक्ता खत्री ने कहा कि संविधान में स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और नागरिक अधिकारों की जो व्यवस्था की गई है, उसका वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का अवसर देना है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल संविधान अच्छा बना देना पर्याप्त नहीं है; उसकी सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे लागू और संचालित करने वाले लोग कितने संवेदनशील एवं लोकतांत्रिक हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को केवल चुनाव और राजनीतिक संस्थाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। राजनीतिक लोकतंत्र के साथ सामाजिक लोकतंत्र भी जमीन पर दिखाई देना चाहिए। समाज के किसी सीमित वर्ग के बजाय प्रत्येक व्यक्ति की समान भागीदारी और गरिमा सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक कसौटी है।

खत्री ने वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था की चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और उनकी लोकतांत्रिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वतंत्र एवं निर्भीक विधि व्यवसाय लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए आवश्यक है।

यात्रा संयोजक सत्यनारायण ने लोक मंथन यात्रा की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोक मंथन का उद्देश्य समाज में बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देना और भारतीय दृष्टि से समसामयिक विषयों पर संवाद खड़ा करना है।

उन्होंने बताया कि यात्रा 2 सितंबर को जैसलमेर से प्रारंभ होकर राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए दिसंबर में व्यापक समापन आयोजन की ओर आगे बढ़ रही है। यात्रा का केंद्रीय भाव ‘हम भारत के लोग’ है।

अलगोजे की धुन ने बांधा समां

संगोष्ठी में विचार-विमर्श के साथ राजस्थान की लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई दी। विश्वविख्यात अलगोजा वादक तगाराम भील की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। लोकगीत, भजन और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को राजस्थान की लोक परंपरा से जोड़ा।

कार्यक्रम में संत नारायण भारती, जोधपुर प्रांत के प्रांत संघचालक हरदयाल, आरएचआरडी फाउंडेशन के संरक्षक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस कन्हैयालाल बैरवा, अधिवक्ता परिषद के संयोजक विमलेश कुमार पुरोहित, त्रिलोक खत्री, अमृत दैया, डॉ. लीलाधर कुमावत, चिरंजीलाल सोनी सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन राजकुमार ने किया। अंत में विमलेश कुमार पुरोहित ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि भारत की लोक परंपराओं, सामाजिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों के बीच संवाद को मजबूत किए बिना लोकतंत्र को व्यापक सामाजिक आधार नहीं दिया जा सकता। इसी विचार को लेकर ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ लोक मंथन यात्रा आगे बढ़ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव