स्वरोजगार की दिशा में मुर्गी पालन व्यवसाय बेहद कारगर
जोधपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. वीएस जैतावत ने कहा कि समय की मांग को देखते हुए युवा छोटी उम्र से ही एंटरप्रेन्योर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ उनके कौशल में वृद्धि होगी अपितु आमदनी में भी इजाफा होगा। कुलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने यह विचार कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र की ओर से आयोजित मुर्गी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के दौरान व्यक्त किए।
अध्यक्षीय संबोधन देते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को कहा कि इस प्रशिक्षण में 19 साल के युवा से लेकर 70 वर्ष की आयु वाले प्रशिक्षणार्थी भी शामिल हुए हैं। हुनर सीखने के लिए प्रशिक्षणार्थियों की यह लगन बेहद काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि मुर्गी पालन स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया है। इससे कम समय में ही व्यवसाय के स्तर को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही मुर्गीपालन की वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर इस क्षेत्र से अधिक से अधिक आर्थिक लाभ अर्जित कर स्वावलंबन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान किसान कौशल विकास केंद्र के डॉ. प्रदीप पगारिया ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि यह केंद्र लगातार पश्चिमी राजस्थान के युवाओं व किसानों को कौशल का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने हेतु लगातार प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। समारोह में आभार जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संगीता शर्मा ने जताया। मंच संचालन प्रशिक्षण अधिकारी नीलिमा मकवाना ने किया। इस दौरान प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. प्रियंका, डॉ. मनीष बेड़ा, अनिल यादव व तकनीकी सहायक नरहरी जोशी भी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश