राजस्थान की 3314 पंचायतों में सरपंच-पंच चुनाव की तैयारी पूरी, बैलेट पेपर से होगा मतदान

 


जयपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान के गांवों में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव शुरू हो गया है। प्रदेश के 16 जिलों की 3314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुनने के लिए चुनावी प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच गई है। पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब मतदाता अपने गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे। इस चरण में 3314 सरपंच और 28,682 वार्ड पंचों के पदों के लिए मुकाबला होगा। मतदान के लिए प्रदेशभर में 9886 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

पहले चरण में मतदान सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगा।

मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाने हैं। गांवों में सरपंच और वार्ड पंच बनने के लिए प्रत्याशियों ने अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की है। इन चुनावों में स्थानीय मुद्दे, व्यक्तिगत संपर्क और गांव की राजनीति अहम भूमिका निभाएंगे।

पंचायतीराज चुनाव में इस बार मतदान की प्रक्रिया भी चर्चा का विषय है। पिछले चुनाव में सरपंच और वार्ड पंच के लिए ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इस बार बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाएगा। मतदाता को दो अलग-अलग मतपत्रों पर वोट डालना होगा। एक मतपत्र सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए और दूसरा वार्ड पंच के प्रत्याशी के लिए होगा।

बैलेट पेपर से मतदान होने के कारण मतगणना में अपेक्षाकृत अधिक समय लगने की संभावना है।

पहले वार्ड पंचों के मतों की गिनती होगी और इसके बाद सरपंच पद के मतों की गणना की जाएगी। ऐसे में कुछ पंचायतों के नतीजे देर रात तक आने की संभावना है। जिन स्थानों पर हार-जीत का अंतर बेहद कम होगा, वहां दोबारा मतगणना की स्थिति बनने पर परिणाम में और देरी हो सकती है।

सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते हैं। राजनीतिक दल आधिकारिक तौर पर पार्टी के चुनाव चिह्न पर प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारते। इसके बावजूद गांवों में चुनावी मुकाबला काफी रोचक रहता है।

स्थानीय समीकरण, सामाजिक समीकरण, व्यक्तिगत संबंध और गांव के विकास से जुड़े मुद्दे प्रत्याशियों की जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

पहले चरण में बाड़मेर जिले में सबसे ज्यादा सरपंच पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। यहां 419 सरपंच पदों के साथ बड़ी संख्या में वार्ड पंचों के पदों पर भी मतदान होना है। सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा। इसमें आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करेंगे, बल्कि निर्वाचित वार्ड पंच आपस में मतदान कर उपसरपंच का चयन करेंगे। इस तरह पंचायत चुनाव की प्रक्रिया उपसरपंच के निर्वाचन के साथ अगले चरण में पहुंचेगी।

चुनाव ड्यूटी में लापरवाही के मामलों पर भी प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। बीकानेर में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 28 कर्मचारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी निशान्त जैन ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित कर्मचारियों को तीन दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। पहले चरण के इन चुनावों में जहां प्रशासन की प्राथमिकता शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराना है, वहीं गांवों में प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मतदान और मतगणना के बाद स्पष्ट होगा कि ग्रामीण मतदाताओं ने अपने गांव की कमान किसके हाथों में सौंपी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित