संस्कृत भारती और जेएनवी विश्वविद्यालय में एमओयू

 


भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका: कुलपति प्रो. शर्मा

जोधपुर, 07 सितम्बर (हि.स.)। पण्डित दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय के डॉ. राधाकृष्णन सभागार में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती जोधपुर के मध्य समझौता ज्ञापन सम्पन्न हुआ। समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव तथा संस्कृत भारती की ओर से तुलसी दास शर्मा ने हस्ताक्षर किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल स्वरूप को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध दार्शनिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक परम्परा का एक बड़ा हिस्सा संस्कृत भाषा में निहित है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परम्परा से जोडऩे में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन के नए अवसर प्रदान करेगा। संस्कृत भारती के तुलसी दास शर्मा ने समझौता ज्ञापन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समझौते के माध्यम से विश्वविद्यालय में संस्कृत के अध्ययन एवं व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत शिक्षण, संभाषण एवं जनसामान्य के बीच संस्कृत के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सवाई सिंह राजपुरोहित थे। कार्यक्रम के प्रारम्भ में पण्डित दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ की निदेशिका डॉ. विजय श्री ने अतिथियों का स्वागत किया। समझौते के माध्यम से विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती परस्पर सहयोग से संस्कृत भाषा शिक्षण, संभाषण कार्यक्रम, प्रशिक्षण, व्याख्यान, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां तथा भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित कर सकेंगे। कार्यक्रम के अंत में प्रो. केए गोयल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश