जयपुर में सनातन संवाद: मंदिर प्रबंधन—सामाजिक व्यवस्था और जनजागरण पर हुआ मंथन

 


जयपुर, 28 अप्रैल (हि.स.)। संस्कृति युवा संस्था की ओर से ‘सनातन संवाद-प्रथम कड़ी’ का आयोजन मंगलवार को स्टेच्यू सर्किल के पास स्थित एक होटल में हुआ। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि रहे। संवाद में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता, मंदिर प्रबंधन, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और जनजागरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य अतिथि वासुदेव देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति समाज की आधारशिला है और इसे सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, जागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच समाज को सही दिशा देने में सहायक होते हैं।

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि गृहस्थ परंपरा से संचालित मंदिर आज भी समाज में जीवंत और प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। परिवार आधारित सेवा परंपरा में श्रद्धा, जिम्मेदारी और पारदर्शिता का संतुलन देखने को मिलता है, जिससे मंदिर समाज से जुड़े रहते हैं।

संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में संवाद और समन्वय की सबसे अधिक आवश्यकता है। समाज में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, परिवार व्यवस्था प्रभावित हो रही है, ऐसे में हमें सनातन मूल्यों को समझते हुए उन्हें व्यवहार में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज भी अनेक मंदिर परिवार आधारित सेवा परंपरा से सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जहां पीढिय़ों से पूजा-पद्धति, सेवा और प्रबंधन की परंपरा निभाई जा रही है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि खाटू श्याम मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर, करणी माता मंदिर, मोती डूंगरी गणेश मंदिर, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, एकलिंगजी मंदिर, चारभुजा जी मंदिर, रणछोडज़ी मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, रानी सती मंदिर, जीण माता मंदिर, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, गोविंद देव जी मंदिर, कैलादेवी मंदिर, जगदीश मंदिर, रामदेवरा मंदिर और नाकोडा जी मंदिर जैसे मंदिर आज भी इस परंपरा के सशक्त उदाहरण हैं।

पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि ये मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक मार्गदर्शन, संस्कार निर्माण और सेवा कार्यों के प्रमुख केन्द्र भी हैं। आपदा के समय सहयोग, सामाजिक गतिविधियों और बड़े आयोजनों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिरों में सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकारी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ‘‘सनातन संवाद’’ को प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। संरक्षक एच.सी. गणेशिया ने कहा कि यह केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सतत प्रक्रिया है।

आचार्य राजेश्वर ने कहा कि सनातन परंपराएं आज भी समाज की मजबूत नींव हैं और इन्हें सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद जरूरी है। इस कार्यक्रम में विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य, त्रिवेणी पीठाधीश्वर रामरिछपाल दास जी महाराज, धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य महाराज, संत समाज के अध्यक्ष सियाराम दास, शुक सम्प्रदाय आचार्य अलबेली माधुरी शरण महाराज, पंचखंड पीठाधीश्वर स्वामी सोमेन्द्र महाराज, अमरापुर स्थान के स्वामी मोनू महारा, सालासर बालाजी से रविशंकर पुजारी, खाटू श्याम जी मंदिर से महेन्द्र चौहान, नाथ संप्रदाय के स्वामी योगेन्द्रनाथ महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्यजन मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश