भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास करेंगे राष्ट्र संत पुलकसागरजी
भीलवाड़ा, 23 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पूज्य पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि जब तक हम स्वयं बदलने का संकल्प नहीं करेंगे, तब तक भगवान भी हमें नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का उद्देश्य लोगों में आत्मपरिवर्तन की भावना जागृत करना और समाज में सद्भाव, संस्कार तथा राष्ट्र चेतना को मजबूत करना है।
गुरुवार को मंडपिया स्थित आरएसडब्ल्यूएम परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा की वर्षों पुरानी चातुर्मास की भावना इस वर्ष पूरी हो रही है। उन्होंने भीलवाड़ा को चातुर्मास के लिए इसलिए चुना क्योंकि यहां साम्प्रदायिक सौहार्द, मानवीयता और अच्छे श्रोताओं की परंपरा है। उन्होंने कहा कि अच्छे श्रोता ही अच्छे वक्ता बनाते हैं और वस्त्रनगरी में चातुर्मास के माध्यम से लोगों के दिलों के ताने-बाने जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
करीब 11 वर्षों के अंतराल के बाद तीसरी बार भीलवाड़ा पहुंचे पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास में राष्ट्र, समाज और व्यक्ति के हित से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और राष्ट्र पुनर्स्थापना पर विशेष चिंतन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व का निर्माण होता है, इसलिए परिवार रूपी जड़ों को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा। 1 है अगस्त को चित्रकूटधाम में गुरु गुणानुवाद कार्यक्रम तथा 2 अगस्त को मंगल कलश स्थापना होगी। वहीं 15 से 30 अगस्त तक ज्ञान गंगा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। नियमित प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में होंगे।
इस्तीफे नहीं, व्यवस्था में सुधार जरूरी-
दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि युवाओं में ऊर्जा तो है, लेकिन उन्हें सही दिशा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ कठोरता उचित नहीं है, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल किसी का इस्तीफा लेने से हालात नहीं बदलते, बल्कि व्यवस्था में सुधार आवश्यक है। सिस्टम बदले बिना समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
सन्यास की कोई निश्चित उम्र नहीं--
सन्यास और दीक्षा पर उन्होंने कहा कि वैराग्य की भावना कब जागृत होगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं होता। इसलिए सन्यास की कोई उम्र तय नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई बालक दीक्षा लेना चाहता है तो उसे रोकना नहीं चाहिए, क्योंकि वह गलत नहीं बल्कि कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ रहा होता है। संथारा पर उन्होंने कहा कि यह शांत भाव से जीवन त्यागने की आध्यात्मिक साधना है, इसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता। यह मजबूरी नहीं बल्कि आत्मिक साधना का सर्वोच्च स्वरूप है।
चातुर्मास संयोजक मनीष शाह ने बताया कि 25 जुलाई को सर्व समाज के सहयोग से पूज्य गुरुदेव का भव्य राजशाही स्वागत किया जाएगा। छह संत और तीन क्षुल्लिकाओं के साथ मंगल प्रवेश शोभायात्रा शाम 4 बजे रामधाम से प्रारंभ होकर रेलवे फाटक, स्टेशन चैराहा, गोल प्याऊ, नेताजी सुभाष मार्केट, सिंधुनगर और पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर होते हुए सूर्यमहल पहुंचेगी।
शोभायात्रा में ड्रोन से पुष्पवर्षा, नासिक का प्रसिद्ध ढोल बैंड, उज्जैन का महाकाल ताशा बैंड तथा पुष्कर के अंतरराष्ट्रीय नगाड़ा वादक नाथूसिंह सोलंकी की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी। दिगम्बर जैन महिला मंडलों द्वारा देशभक्ति और धर्म संस्कृति पर आधारित सजीव झांकियां भी निकाली जाएंगी।
विहार यात्रा जारी--
पुलकसागरजी महाराज का विहार गुरुवार सुबह हमीरगढ़ स्थित नितिन स्पिनर्स से प्रारंभ होकर मंडपिया स्थित आरएसडब्ल्यूएम परिसर पहुंचा। विहार संयोजकों के नेतृत्व में 100 से अधिक युवा श्रद्धालु धर्मध्वजा के साथ यात्रा में शामिल हैं। शुक्रवार को विहार शाह फार्म हाउस तक पहुंचेगा और शनिवार को जय विलास होटल से दोपहर 3 बजे रवाना होकर रामधाम चैराहे से भीलवाड़ा नगर में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद