सुरक्षित विद्यालय सिर्फ भवन नहीं, बच्चों के लिए सम्मान और भरोसे का माहौल जरूरी: निदेशक
जयपुर, 08 सितंबर (हि.स.)।
विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित, समावेशी और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को ‘सुरक्षित विद्यालय वातावरण एवं संस्कृति’ विषय पर राज्य स्तरीय वेबिनार आयोजित किया गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमेट), समग्र शिक्षा, निदेशालय माध्यमिक शिक्षा, यूएनएफपीए, यूनिसेफ एवं पीरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार की अध्यक्षता सीमेट निदेशक डॉ. नरेंद्र चौधरी ने की।
डॉ. चौधरी ने कहा कि विद्यालय की सुरक्षा को केवल भवन और भौतिक संसाधनों तक सीमित नहीं किया जा सकता। बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी खुद को सुरक्षित, सम्मानित, स्वीकार्य और सहज महसूस करे। उन्होंने कहा कि बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके संस्कार, सम्मान और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी शिक्षा तंत्र का दायित्व है। सुरक्षित वातावरण ही बच्चों के समग्र विकास की आधारशिला है।
वेबिनार में विद्यालय सुरक्षा के शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और डिजिटल पहलुओं के साथ बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्यालय प्रमुखों को सुरक्षित एवं सकारात्मक विद्यालयी संस्कृति के नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाने पर जोर दिया गया, वहीं जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निगरानी, मार्गदर्शन और सहयोग की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया।
बाल संरक्षण और लैंगिक संवेदनशीलता पर जोर
सत्र के दौरान लैंगिक संवेदनशीलता, बाल संरक्षण, पॉक्सो अधिनियम, विद्यालय में मर्यादित आचरण, सुरक्षित सीमाएं तथा विद्यार्थियों की शिकायतों पर संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देने जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई। अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और समुदाय की भूमिका पर चर्चा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था में सामूहिक सहभागिता को जरूरी बताया गया।
प्रतिभागियों को विद्यालयों में संभावित सुरक्षा जोखिमों की पहचान करने, उपलब्ध व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने और आत्म-मूल्यांकन के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया। समापन सत्र में प्रत्येक प्रतिभागी से अपने विद्यालय में सुरक्षा को लेकर कम से कम एक ठोस और व्यावहारिक पहल करने का आह्वान किया गया।
वेबिनार में प्रदेश के सभी जिलों से संयुक्त निदेशक, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा अधिकारी सहित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि विद्यार्थी सुरक्षा पूरे शिक्षा तंत्र की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए विद्यालय, शिक्षक, परिवार व समुदाय को मिलकर काम करना होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित