सचिन पायलट ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा

 


टोंक, 17 जुलाई (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने शुक्रवार को टोंक में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र और राजस्थान सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, कर्मचारियों के तबादलों और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

पायलट ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 19-20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं और उनकी मांगों को केंद्र सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लगातार पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और भर्ती अनियमितताओं से करोड़ों छात्रों का व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी युवाओं के इन मुद्दों को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा देश के भविष्य की नींव है, लेकिन केंद्र सरकार इस विषय को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रही। उनका कहना था कि सरकार को अनशनकारियों से संवाद कर समाधान निकालना चाहिए, लेकिन अब तक कोई गंभीर पहल नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं का विश्वास बहाल करना चाहती है तो शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।

राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गर्भवती महिलाओं की मौत जैसे गंभीर मामलों में भी जिम्मेदारी तय नहीं हो रही है और केवल छोटे अधिकारियों के तबादले कर औपचारिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। सरकार की प्रतिक्रिया असंवेदनशील है और जनता का विश्वास लगातार टूट रहा है।

उन्होंने कर्मचारियों के तबादलों को लेकर भी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि प्रतिशोध की भावना से स्थानांतरण किए जा रहे हैं। पायलट ने कहा कि तबादलों के लिए स्पष्ट नीति और मापदंड होने चाहिए। राजनीतिक हित साधने और कर्मचारियों से दुश्मनी निकालने के लिए किए जा रहे तबादले लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं।

राजनीति में बढ़ रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर चिंता जताते हुए पायलट ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपने आचरण और भाषा से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैचारिक और सैद्धांतिक विरोध लोकतंत्र की मजबूती है, लेकिन व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और सोशल मीडिया पर अपमानजनक भाषा समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं देती।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि पर्याप्त तकनीकी तैयारी और वाहन निर्माताओं की सहमति के बिना इस नीति को लागू किया गया है, जिससे आम लोगों के वाहन प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे वाहन चालकों को इंजन खराब होने और माइलेज कम मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और एथेनॉल नीति समेत जनता से जुड़े सभी मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित