एमडीएसयू में नामांकन बढ़ाने का रोडमैप तैयार
अजमेर, 27 अप्रैल (हि.स.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में घटते विद्यार्थी नामांकन, शिक्षण गुणवत्ता में सुधार और संस्थागत विकास को गति देने के उद्देश्य से व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय के प्रत्येक शिक्षक को न्यूनतम 5 से 10 नए विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है, वहीं प्रत्येक विभाग को प्रथम सेमेस्टर में कम से कम 30 विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह निर्णय विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित अतिथि संकाय सदस्यों की बैठक में लिया गया। बैठक में कुलसचिव कैलाश चंद्र शर्मा, वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अतिथि संकाय सदस्य उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के सुदृढ़ विकास में अतिथि संकाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 110 अतिथि संकाय सदस्य विभिन्न विभागों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं और उनसे अपेक्षा है कि वे केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित न रहकर संस्थागत जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को सक्रिय प्रयास करने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि संभावित विद्यार्थियों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाए, उन्हें विश्वविद्यालय की विशेषताओं से अवगत कराया जाए तथा सोशल मीडिया के माध्यम से शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों का प्रभावी प्रचार किया जाए। विश्वविद्यालय परिसर, छात्रावास, खेल सुविधाएं, छात्रवृत्तियां और “लर्न अर्न एंड परफॉर्म” जैसी योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत करने पर भी जोर दिया गया।
शिक्षण गुणवत्ता के संदर्भ में कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग नेट/सेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को पाठ्यक्रम से जोड़ें। साथ ही विधि विभाग में मूट कोर्ट और पत्रकारिता विभाग में प्रायोगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विभाग वर्ष में कम से कम एक संगोष्ठी या सेमिनार आयोजित करेगा, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय स्तर पर प्लेसमेंट फेयर आयोजित करने तथा नवगठित एलुमनी एसोसिएशन के माध्यम से पूर्व विद्यार्थियों को जोड़कर संस्थान की पहचान को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया गया।
प्रशासनिक स्तर पर कुलगुरु ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षाओं के परिणाम जुलाई माह के अंत तक घोषित किए जाएं, ताकि प्रवेश प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके। अतिथि संकाय के भुगतान में हो रही देरी की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विभागाध्यक्षों को वर्कलोड से संबंधित आंकड़े शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। बैठक के अंत में कुलगुरु ने अतिथि शिक्षकों से संस्थान के प्रति अपनत्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्वयं को केवल कर्मचारी न मानें, बल्कि विश्वविद्यालय के विकास में सहभागी के रूप में कार्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कक्षा में एक भी विद्यार्थी उपस्थित हो, तो भी शिक्षण कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ किया जाना चाहिए।
कुलसचिव कैलाश चंद्र शर्मा ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि किसी भी विभाग का अस्तित्व उसकी प्रासंगिकता और विद्यार्थियों को आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे बैठक में लिए गए निर्णयों को शीघ्र लागू करें और विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष