नदियों में प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया हलफनामा
जोधपुर, 18 मार्च (हि.स.)। जोधपुर-पाली और बालोतरा जिले की जोजरी, बांडी और लूनी नदी में प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद राज्य सरकार ने तत्काल आदेश जारी कर आरएएस अफसर मनोज सोलंकी को हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी का रजिस्ट्रार (नोडल ऑफिसर) नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने बुधवार को अपना विस्तृत हलफनामा पेश किया। इसमें सरकार ने कमेटी के लिए नोडल ऑफिसर (रजिस्ट्रार) सहित अन्य पदों पर की गई नियुक्तियों की जानकारी कोर्ट को दी। अदालत ने सरकार के इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को बताया कि समिति की पहली रिपोर्ट में उठाई गई सभी प्रशासनिक और व्यवस्थागत चिंताओं का अब राज्य सरकार द्वारा पूर्ण रूप से समाधान कर दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि समिति के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने आवश्यक आधारभूत संरचना और सहयोगी स्टाफ उपलब्ध करा दिया है।
वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि समिति के लिए एक डेडिकेटेड आरएएस अधिकारी (मनोज सोलंकी) को रजिस्ट्रार-कम-नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, एक पूर्णकालिक वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता और एक स्टेनोग्राफर की भी नियुक्ति की गई है, ताकि समिति का कामकाज बिना किसी बाधा के चल सके। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर खुशी जताई कि राजस्थान सरकार इस मामले को प्रतिद्वंद्वी मुकदमेबाजी की तरह नहीं, बल्कि एक रचनात्मक तरीके से ले रही है। खास बात यह रही कि उद्योगों की ओर से वकील विनय कोठारी और केंद्र सरकार की ओर से एएसजी अर्चना पाठक दवे ने भी समिति की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं जताई। सबने एक सुर में नदी के पुनरुद्धार का समर्थन किया।
यह है जोजरी नदी का पूरा विवाद
यह मामला फैक्ट्रियों के जहरीले पानी और सीवेज से बर्बाद हो रही खेती और भूजल से जुड़ा है। 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी की बदहाली पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को जस्टिस संगीतम लोढ़ा की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी बनाई गई थी। 10 मार्च 2026 को इस समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें औद्योगिक कचरे और अवैध डिस्चार्ज प्वाइंट्स का कच्चा चि_ा खोला गया था। अपनी रिपोर्ट में समिति ने जोधपुर, पाली और बालोतरा में जमीनी निरीक्षण के बाद नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक वैज्ञानिक ब्लूप्रिंट तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। राज्य सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने पर अपनी सहमति दे दी है। अब कोर्ट के सुरक्षित आदेश से यह तय होगा कि पश्चिमी राजस्थान की इन नदियों को प्रदूषण के जहर से कब और कैसे पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश