नॉन-अल्कोहॉलिक लोगों में तेजी से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा: डॉ. ऋषब शर्मा

 


जयपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। आज के समय में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और अब यह केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रही। नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं।

लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषब शर्मा के अनुसार, उनके हालिया ओपीडी आंकड़ों में फैटी लिवर के 100 मरीजों में से लगभग 70 मरीज ऐसे हैं, जो शराब का सेवन नहीं करते, फिर भी इस बीमारी से ग्रसित हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि गलत खान-पान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और पेट की चर्बी इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। जंक फूड, तला-भुना भोजन, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत इसे बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के साथ-साथ अब 6-7 साल के बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने सलाह दी कि नियमित व्यायाम, मसल बिल्डिंग एक्सरसाइज, जिम वर्कआउट और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से शरीर का अतिरिक्त फैट कम होता है और लिवर में जमा चर्बी धीरे-धीरे घटती है।

डॉ. शर्मा ने लोगों से समय रहते जांच कराने की अपील करते हुए कहा कि पेट की सोनोग्राफी के जरिए इस बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाया जा सकता है और समय पर उपचार संभव है।

उन्होंने संतुलित आहार लेने, भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने, सीमित मात्रा में कॉफी सेवन करने, रात में दूध से परहेज रखने और नियमित समय पर भोजन करने की सलाह दी। साथ ही रात 8 बजे के बाद भोजन न करने और रोजाना व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया, ताकि फैटी लिवर जैसी समस्या से बचा जा सके।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश