(अपडेट) बियालीस घंटे तक डटे रहे कांग्रेसी, खाली हाथ लौटे कमिश्नरेट से!

 


जयपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। करीब 42 घंटे तक पुलिस कमिश्नरेट में डटे रहने के बाद आखिरकार कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा। जिस मांग को लेकर कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला था, उस पर सहमति नहीं बन सकी। कांग्रेस की मांग थी कि एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट और अभद्रता के मामले में राजस्थान में जीरो एफआईआर दर्ज की जाए। जयपुर पुलिस कमिश्नर ने जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हुए लिखित पत्र सौंप दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं का धरना समाप्त हो गया। बाद में नेताओं ने कहा कि अब वे एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट जाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस प्रशासन और कांग्रेस के बीच टकराव चर्चा का विषय बना रहा। कांग्रेस नेता लगातार अपनी मांग पर अड़े रहे, लेकिन पुलिस कमिश्नर के इनकार के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। करीब दो दिन तक चले इस घटनाक्रम का अंत किसी समाधान के बजाय लिखित इनकार के साथ हुआ। पुलिस प्रशासन की ओर से लिखित पत्र मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने कमिश्नरेट से बाहर निकलने का फैसला किया।

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत प्रतिनिधिमंडल से बात कर स्पष्ट किया कि यहां जीरो नंबरी एफआईआर दर्ज नहीं होगी। उन्होंने हवाला दिया कि एक बार परिवाद दर्ज हो चुका है, उसकी बीएनएस की धारा 173 (1) के तहत जीरो एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। वहीं डोटासरा ने कहा कि परिवाद दर्ज होने के बाद भी जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है। कांग्रेस पार्टी अब कोर्ट जाएगी। यदि मामले में पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया जाता है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी।इस संबंध में जयपुर कमिश्नर सचिन मित्तल ने कहा कि 19 अक्टूबर को रितु बराला मोती डूंगरी थाने पर आई थी। रितु बराला की ओर से दी गई शिकायत को लिया गया था। फिर उसकी जांच के लिए दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में संपर्क किया गया। वहां से बताया गया कि 13 अक्टूबर को ही रितु बराला की ओर से संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज करा दी गई थी, जिसकी जांच चल रही है। ऐसे में जब पहले से ही वहां मामला दर्ज है और जांच चल रही है तो यहां जीरो नंबरी एफआईआर दर्ज करना कानूनी रूप से सही नहीं है। इस संबंध में कांग्रेस नेताओं को बता दिया था। आज प्रतिनिधिमंडल से बात हुई, उन्होंने लिखकर देने को कहा, हमने ये ही बात लिखित में दे दी।इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया है। इसलिए वे अब कोर्ट जाएंगे। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।इससे पूर्व पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का धरना बुधवार सुबह भी जारी रहा। इसी दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का संतुलन बिगड़ने से वे गिर गए। कमरा नंबर 9 में प्रवेश करते समय उनकी चौखट से टक्कर हो गई, जिससे वे संभल नहीं पाए। मौके पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें सहारा देकर उठाया। हादसे में उनके पैर के पंजे में चोट आई है।

डोटासरा सोमवार शाम से कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस कमिश्नरेट परिसर में धरने पर बैठे थे।

इधर, रितु बराला ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सड़क पर सोकर दो रातें बिताई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण है और लोकतंत्र में अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। बराला ने कहा कि वे न्याय की मांग कर रहे हैं और जीरो एफआईआर दर्ज करना पांच मिनट का काम है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी पुलिस प्रशासन पर असहयोग का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता नियमानुसार अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से बातचीत नहीं की जा रही। जूली ने आरोप लगाया कि कमिश्नरेट परिसर में शौचालयों पर ताले लगा दिए गए और नेताओं को पार्क में बैठने से भी रोका गया। उन्होंने कहा कि एक बेटी को न्याय दिलाने की मांग को दबाया नहीं जा सकता। बुधवार सुबह पुलिस अधिकारियों ने कांग्रेस नेताओं को कमिश्नरेट के गार्डन में बैठने से रोक दिया। वहां बिछाए गए गद्दे भी हटवा दिए गए।

इस पर कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताया और कुछ देर के लिए विवाद की स्थिति बन गई। बाद में बैठने के लिए दूसरी जगह बताए जाने पर मामला शांत हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित