जयपुर की सड़कों पर सजा रावण बाजार: महंगाई से दोगुनी हुई पुतलों की कीमत
जयपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक विजयादशमी पर्व को लेकर राजधानी में उत्साह चरम पर है। मंगलवार को दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर के विभिन्न इलाकों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं सोडाला, मानसरोवर मेट्रो स्टेशन, आदर्श नगर, टोंक रोड, सहकार मार्ग और अजमेर रोड सहित प्रमुख सड़कों पर रावण बाजार सज गए हैं। इन बाजारों में पुतलों की खरीदारी और उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। हालांकि इस बार भी महंगाई ने रावण के पुतलों की कीमत भी बढ़ा दी है। कच्चे माल के दाम बढ़ने से पुतले बनाने की लागत में इजाफा हुआ है और कारीगरों के अनुसार कई आकार के पुतलों की कीमत पिछले साल के मुकाबले दोगुनी तक हो गई है।
मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास सजे अस्थायी बाजार में अलग-अलग आकार और आकर्षक सजावट वाले रावण के पुतले लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यहां बच्चों के लिए छोटे पुतलों से लेकर कॉलोनी समितियों, क्लबों और सार्वजनिक आयोजनों के लिए 10 से 51 फीट तक के विशाल पुतले उपलब्ध हैं। कारीगरों ने रंग-बिरंगे कागज, आकर्षक मुकुट, तलवार और बड़ी-बड़ी मूंछों से पुतलों को सजाया है। रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं।
रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर राहुल ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से इस बार पुतले बनाना महंगा हो गया है। पहले बांस करीब 100 से 150 रुपये में मिलता था, जिसकी कीमत अब बढ़कर 200 रुपये हो गई है। इसी तरह पुराने अखबार की रद्दी के भाव में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले रद्दी करीब 10 रुपए प्रति किलो मिलती थी, जबकि अब इसकी कीमत बढ़ गई है।
कारीगर काले के अनुसार कबाड़ी घरों से रद्दी खरीदकर पेपर मिलों को करीब 25 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचते हैं। पेपर मिलों की ओर से रद्दी के भाव बढ़ने का असर पुतलों की लागत पर भी पड़ रहा है। एक पुतला बनाने में करीब 30 से 35 किलो तक रद्दी कागज लग जाता है। ऐसे में केवल कागज पर होने वाला खर्च भी बढ़ गया है।
पुतलों का ढांचा तैयार करने में लोहे के तार का भी इस्तेमाल होता है। कारीगरों के मुताबिक पिछले साल लोहे का तार करीब 60 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 85 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। एक पुतले के निर्माण में करीब 10 किलो तार लग जाता है। बांस, कागज और तार की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अन्य सामग्री महंगी होने से पुतलों की कुल लागत पर असर पड़ा है। कारीगरों का कहना है कि राजधानी में इस बार अधिक बारिश ने भी उनके काम को प्रभावित किया है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
कारीगर जगदीश ने बताया कि वह कई वर्षों से अपने परिवार के साथ रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। दशहरे से करीब एक महीने पहले ही अलग-अलग जगहों से पुतलों के ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। पुतलों की कीमत उनकी ऊंचाई और आकार के हिसाब से तय होती है। सामान्य तौर पर 10 से 30 फीट तक के पुतले बनाए जाते हैं, लेकिन इस बार बाजार में बड़े पुतलों की मांग भी है। बच्चों के लिए एक से पांच फीट तक के छोटे पुतले भी उपलब्ध हैं।
पुतलों की कीमत पर एक नजर
3 फीट का पुतला — 600 रुपये
5 फीट का पुतला — 1,000 रुपये
10 फीट का पुतला — 4,000 रुपये
20 फीट का पुतला — 7,000 रुपये
50 फीट का पुतला — 80,000 रुपये
100 फीट का पुतला — एक लाख रुपये से अधिक
पारंपरिक कारीगर कई सप्ताह से दिन-रात मेहनत कर बांस, रस्सी, रंगीन कागज और सरेस की मदद से पुतले तैयार कर रहे हैं। महंगाई के बावजूद कारीगरों का उत्साह बना हुआ है। कॉलोनी समितियां और स्थानीय आयोजक अपनी जरूरत के अनुसार पुतलों की अग्रिम बुकिंग करा रहे हैं।
बाजार में रावण के पुतलों के अलावा बच्चों के लिए मुखौटे, तीर-कमान, गदा और राम-लक्ष्मण से जुड़े खिलौने भी बिक रहे हैं। दशहरे से एक दिन पूर्व सोमवार शाम होते ही मानसरोवर मेट्रो स्टेशन,सोडाला, आदर्श नगर, टोंक रोड, सहकार मार्ग और अजमेर रोड सहित प्रमुख सड़कों पर मेले जैसा नजर आने लगा है। परिवारों के साथ लोग पुतलों के दाम पूछने और खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। बच्चों और युवाओं में रावण दहन को लेकर खास उत्साह है। अब शहरवासियों को विजयादशमी के उस पल का इंतजार है, जब बुराई के प्रतीक रावण के पुतलों का दहन होगा और मैदानों में जय श्रीराम के जयकारे गूंजेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश