यातायात प्रबंधन का रेखांकित उदाहरण बन गई राष्ट्र चेतना संकल्प सभा
उदयपुर, 20 जून (हि.स.)। पर्यटकों की पसंद लेकसिटी में जहां ट्रेफिक जाम लगना आम बात है, लेकिन दो दिन पहले शहर में 25 हजार से अधिक लोग आए और चले गए, लेकिन मजाल है कि कहीं शहरवासियों को ट्रेफिक से दिक्कत हुई हो। राष्ट्र चेतना संकल्प सभा के दौरान आयोजकों द्वारा प्रशासन के साथ मिलकर की गई यातायात प्रबंधन की यह व्यवस्था अपने आप में उदाहरण बन गई है।
गौरतलब है कि प्रताप गौरव केन्द्र के तत्वावधान में महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी सार्द्ध चतुः शती समारोह के तहत 17 जून को महाराणा भूपाल स्टेडियम गांधी ग्राउंड में विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत थे। इस सभा में पूरे उदयपुर संभाग सहित अन्य शहरों से 25 हजार से अधिक लोग पहुंचे। सुबह 9 बजे से लोग गांधी ग्राउंड आना शुरू हुए और दोपहर दो बजे बाद वहां से लौटना शुरू हुए। इसबीच, शहर में महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा भी निकली, लेकिन कहीं भी वाहनों के फंसने जैसी स्थिति नहीं बनी।
बाहर से जो बसें नाथद्वारा, गोगुन्दा की तरफ से आ रही थीं, उनका पार्किंग स्थल फतहपुरा-देवाली मार्ग पर विद्या भवन का मैदान रखा गया। इसके लिए सहेली मार्ग पर फील्ड क्लब के सामने विद्या भवन की दीवार का भी कुछ हिस्सा छोड़ा गया। इसी तरह, चित्तौड़, सलूम्बर, खेरवाड़ा की तरफ से आने वाले वाहनों की पार्किंग फतह स्कूल में रखी गई थी।
इन दोनों स्थानों से गांधी ग्राउंड तक लोगों को लाने-ले जाने के लिए अलग से छोटे वाहनों की व्यवस्था की गई थी। विद्या भवन से गांधी ग्राउंड तक विशेष वाहन सहेलियों की बाड़ी, यूडीए सर्कल होते हुए आकाशवाणी कार्यालय पहुंचे। इसी तरह, फतह स्कूल से विशेष वाहन कुम्हारों का भट्टा, दुर्गा नर्सरी रोड, शास्त्री सर्कल, कोठारी भवन, बंसी पान, एमजी कॉलेज होते हुए आकाशवाणी कार्यालय पहुंचे।
आयोजन समिति ने वाहनों को घुमा कर ही रखने के निर्देश जारी किए थे, ताकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भीड़ में वाहनों को मोड़ने के कारण जाम न लगे।
इसी पूर्व नियोजित प्रबंधन के कारण चेतक सर्कल से हाथीपोल होते हुए जो शोभायात्रा टाउन हॉल पहुंच रही थी, उस मार्ग में राष्ट्र चेतना संकल्प सभा से संबंधित कोई भी वाहन नहीं था।
जिन गणमान्यजनों को लवकुश स्टेडियम की तरफ से प्रवेश करना था, उनके वाहनों की पार्किंग उसी तरफ रखी गई और जिन गणमान्यजनों को लम्बरदार स्कूल की तरफ से प्रवेश करना था, उनके वाहनों की पार्किंग झरिया मार्ग पर रखी गई। झरिया मार्ग से आयोजन स्थल तक गोल्फ कार्ट उपलब्ध रही। इसका प्रभाव यह रहा कि आने वालों को अपने वाहनों के साथ लम्बरदार स्कूल के दरवाजे तक नहीं आना पड़ा। वे सीधे ही झरिया मार्ग पार्किंग में ही पहुंचे।
रही बात दुपहिया वाहनों की तो वह पार्किंग सूचना केन्द्र, मोहता पार्क, एमबी अस्पताल मार्ग पर रही। अन्य चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग फील्ड क्लब, मधुबन, लोक कला मंडल, भट्टजी की बाड़ी, दैत्यमगरी-रेलवे कॉलोनी मार्ग पर रही।
खास बात यह रही कि शहर के आगंतुक कहीं से भी उन वाहनों में चढ़कर गांधी ग्राउंड पहुंच सकते थे जिन पर आयोजन के बैनर लगे थे।
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना का कहना है कि बाहर से 300 बसें और 500 करीब छोटे वाहन आने का अनुमान था और इतने ही शहर में भी। इसी अनुरूप पार्किंग स्थल के विकल्प ढूंढे गए। पूरी एक्सरसाइज में छह स्थान उचित लगे। आगंतुक अतिथियों को निमंत्रण के साथ पार्किंग की भी पूर्व सूचना दी गई। इसके बाद वाहनों के आने और उनके निकलने का मार्ग भी अलग रखा गया, ताकि कोई वाहन आमने-सामने आकर न फंस जाए। शोभायात्रा मार्ग को बिल्कुल अलग रखा गया। पार्किंग से गांधी ग्राउंड तक शटल बसें भी पर्याप्त अंतराल में चलाई गईं ताकि वे एक के पीछे एक फंसें नहीं। सभी को बार-बार कहा गया कि जल्दबाजी न पहले करनी है न सभा खत्म होने के बाद। बाहर से आने वाली हर गाड़ी का पार्किंग स्थल पर बाकायदा पंजीकरण भी किया गया। सवा सौ प्रबंधक कार्यकर्ता और 50-60 गार्ड इस व्यवस्था को संभालने में जुटे। हर योजना प्रशासन के साथ साझा की गई। प्रशासन ने भी कुछ अन्य विकल्प सुझाए। प्रशासन का पूरा सहयोग मिला। सभा के बाद कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से फीडबैक दिया कि कार्यकर्ताओं का पूर्व प्रबंधन इतना सशक्त रहा कि प्रशासन को कोई ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। पार्किंग स्थलों पर पेयजल व अन्य सुविधाएं भी पर्याप्त रखी गईं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता