टोंक में फिर दिखी दुर्लभ सफेद गिलहरी, सीआईएसएफ परिसर में जवानों ने कैमरे में किया कैद

 


टोंक, 31 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान के टोंक जिले में एक बार फिर दुर्लभ अल्बिनो (सफेद) गिलहरी दिखाई देने से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह है। देवली स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आरटीसी परिसर के वन क्षेत्र में नीम के पेड़ों के बीच घूम रही इस दुर्लभ गिलहरी को जवानों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया। वन विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से सकारात्मक संकेत बताया है।

वन विभाग के सहायक वन संरक्षक अनुराग महर्षि ने बताया कि अल्बिनो गिलहरी कोई अलग प्रजाति नहीं होती, बल्कि यह आनुवंशिक परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) के कारण उत्पन्न होने वाली एक दुर्लभ स्थिति है। शरीर में मेलेनिन (रंगद्रव्य) की कमी होने से इसका फर पूरी तरह सफेद तथा आंखें लाल या गुलाबी दिखाई देती हैं।

उन्होंने बताया कि अनुमानितः करीब एक लाख गिलहरियों में से केवल एक ही अल्बिनो गिलहरी होती है, इसलिए इसका दिखाई देना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

उन्होंने कहा कि देवली स्थित सीआईएसएफ परिसर का हराभरा और सुरक्षित वातावरण वन्यजीवों के लिए अनुकूल आवास बन रहा है। लगातार संरक्षण के प्रयासों का ही परिणाम है कि यहां इस दुर्लभ गिलहरी की मौजूदगी दर्ज की गई है।

वन विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष जून में भी इसी सीआईएसएफ परिसर में सफेद गिलहरी देखी गई थी। ऐसे में राजस्थान में यह अल्बिनो गिलहरी का संभवतः दूसरा प्रमुख रिकॉर्ड माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि अल्बिनो गिलहरी की संतान का सफेद होना जरूरी नहीं होता, क्योंकि यह स्थिति केवल आनुवंशिक परिवर्तन के कारण होती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में ऐसे दुर्लभ जीवों का दिखाई देना वहां के पर्यावरण और जैव विविधता के स्वस्थ होने का संकेत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित