श्रीराम-जटायु मिलन और सीता हरण के विदारक प्रसंग से भावुक हुआ रामलीला प्रांगण

 




उदयपुर, 15 अक्टूबर (हि. स.)। श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में निम्बार्क महाविद्यालय सूरजपोल स्थित रामलीला प्रांगण में आयोजित की जा रही रामलीला के सातवें दिन गुरुवार को लंकाकाण्ड-पूर्व के मर्मस्पर्शी व करुण प्रसंगों का जीवंत मंचन हुआ। मंचन के दौरान जैसे ही गिद्धराज जटायु का प्रभु श्रीराम की गोद में प्राण त्यागने का दृश्य सामने आया, संपूर्ण प्रांगण करुणा और भक्ति रस में डूब गया और दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

गुरुवार की लीला का शुभारंभ श्रीराम-ऋषि मिलन के शांत व पावन प्रसंग से हुआ। इसके पश्चात शूर्पणखा नासिका भंग और खर-दूषण वध के पराक्रमी दृश्यों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। लीला के उत्तरार्ध में जब रावण छलपूर्वक माता सीता का हरण कर आकाश मार्ग से लंका की ओर ले जाने लगा, तो धर्म रक्षा के लिए जटायु और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

रावण द्वारा पंख काटे जाने के बाद मरणासन्न पड़े गिद्धराज जटायु ने प्रभु श्रीराम को माता सीता की सुधि दी। प्रभु श्रीराम द्वारा जटायु को अपनी गोद में लेकर अंतिम विदाई देने का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। इस दौरान रामचरितमानस की चौपाई नाथ जुग जुग जियो तुव दासा, मोहि दीन्हि निज पद बिलासा। के सजीव गान और मंचन ने उपस्थित जनसमूह के अंतःकरण को झकझोर दिया। इसके बाद माता सीता के विरह और राक्षसों के क्रूर कृत्य के चित्रण से दर्शक भावविभोर हो उठे।

समिति अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों व चरित्र की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के प्रमुख वेदप्रकाश भारद्वाज, सीताराम भारद्वाज एवं घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में 40 कलाकार रामलीला का सजीव मंचन कर रहे हैं।

महासचिव भंवर लाल शर्मा ने बताया कि अतिथि के रूप में सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा, राजस्थान बार काउन्सिल के सदस्य एडवोकेट रतन सिंह राव, प्रताप गौरव केन्द्र के पदाधिकारी रमन सूद, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र नागदा, मनीष शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषभ जैन, वन्दना उदावत, पूर्व राज्य मंत्री हरीश राजानी, सिंधी समाज के वरिष्ठ संरक्षक प्रतापराय चुघ, पानेरियों की मादड़ी ग्रामसभा के अध्यक्ष बंशीलाल मेनारिया, पूर्व अध्यक्ष रामनारायण मेनारिया, उदयलाल मेनारिया, पिछोलिया नागदा समाज के अध्यक्ष मांगीलाल नागदा, पालीवाल प्रिंटर्स के ख्यालीलाल पालीवाल, पार्षद कुलदीप मेहता, पारीक समाज के संरक्षक हरिशंकर तिवारी, राजकुमार पारीक, निम्बार्क संस्थान के धर्मनारायण नागदा, सामाजिक कार्यकर्ता हिम्मतराम जोशी, शैव्यानारायण जोशी, इतिहास संकलन समिति चित्तौड़ प्रांत के संगठन मंत्री रमेशचंद्र शुक्ल का सम्मान किया गया।

सभी अतिथियों का सम्मान अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, डॉ. विजय विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, अरुण त्रिवेदी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता आदि कार्यकर्ताओं ने किया।

सुविवि के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आसपास वन में रहने वालों को संगठित करके अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और कालांतर में मेवाड़धरा पर प्रातःस्मरणीय महाराणा प्रताप ने भी इसी मार्ग का अनुसरण किया। बार काउंसिल के सदस्य रतन सिंह राव ने इस अवसर कहा कि रामचरित प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक पाथेय है। यह आयोजन समाज में संस्कार जागरण का सार्थक प्रयास है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता