उदयपुर में पहली बार दस दिवसीय राम लीला, नवरात्रा में राममय होगी मेवाड़ धरा

 




उदयपुर, 29 सितम्बर (हि.स.)।

“रामो विग्रहवान् धर्मः साधुः सत्यपराक्रमः।

राजा सर्वस्य लोकस्य देवानामिव वासवः॥”

(श्रीमद् वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड, सर्ग 37, श्लोक 13)

अर्थात श्रीराम स्वयं साकार रूप में धर्म हैं। वे साधु स्वभाव वाले और सत्य के पराक्रमी रक्षक हैं। वे समस्त लोक के राजा हैं, जैसे देवताओं के राजा इंद्र हैं।

सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और लोकमंगल की प्रतिमूर्ति भगवान श्रीराम की यही दिव्य जीवनगाथा सदियों से भारतीय जनमानस को संस्कारित करती आई है। उन्हीं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा को मंच पर जीवंत करने वाली रामलीला लंबे अंतराल के बाद उदयपुर में फिर अपनी भव्य उपस्थिति दर्ज कराने जा रही है। यह आयोजन श्री रामलीला समिति, उदयपुर के बैनर तले 9 अक्टूबर से आरंभ होने जा रहा है। इसका पहला चरण भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के साथ 18 अक्टूबर को सम्पन्न होगा, जबकि दूसरे चरण में दशहरे पर 20 अक्टूबर को रावण का दहन किया जाएगा।

इस संबंध में श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि उदयपुर में पहली बार होने जा रही इस दस दिवसीय भव्य रामलीला में वृंदावन से पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान के 40 परिपक्व कलाकार अपने अभिनय और भावाभिव्यक्ति से भगवान श्रीराम के चरित्र को मंच पर प्रकट करेंगे। रामलीला का मंचन सूरजपोल बाहर स्थित निम्बार्क महाविद्यालय के मैदान में प्रतिदिन शाम 7 से 10 बजे तक होगा। यह संयोग ही है कि इस पूर्व संकल्प को सार्थक करने के लगातार प्रयासों के बीच इसके साकार होने का समय नवरात्रा में प्राप्त हुआ।

रामलीला का आरंभ 9 अक्टूबर को नारद मोह, अवतार प्रयोजन और पृष्ठभूमि के प्रसंगों से होगा। तत्पश्चात 10 अक्टूबर को रावण तपस्या, पृथ्वी पुकार और श्रीराम जन्म का मंचन होगा। 11 अक्टूबर को विश्वामित्र आगमन, ताड़का-सुबाहु वध तथा अहिल्या उद्धार के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 12 अक्टूबर को पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ और श्रीराम-जानकी विवाह का मंचन होगा।

इसी क्रम में 13 अक्टूबर को दशरथ प्रतिज्ञा, कैकेयी का वरदान मांगना और श्रीराम वन गमन, जबकि 14 अक्टूबर को श्रीराम-केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत मिलन के प्रसंग होंगे। 15 अक्टूबर को श्रीरामजी का ऋषियों से मिलन, गिद्धराज जटायु, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध तथा सीता हरण का मंचन किया जाएगा।

16 अक्टूबर को शबरी मिलन, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, सीता अन्वेषण और लंका दहन, जबकि 17 अक्टूबर को श्रीरामजी की सेना का प्रस्थान, विभीषण शरणागत, सेतु बंध रामेश्वर स्थापना, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति के प्रसंग होंगे। रामलीला के अंतिम दिन 18 अक्टूबर को कुंभकरण वध, मेघनाद वध, रावण वध, श्रीरामजी का अयोध्या आगमन तथा राज्याभिषेक का मंचन किया जाएगा।

समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने बताया कि दशहरे के अवसर पर मंगलवार 20 अक्टूबर को रावण दहन एवं भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम शाम 6 बजे सेक्टर—14 नेला स्थित कल्लाजी बावजी चौराहे पर होगा। इस कार्यक्रम में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

मंगलवार को दोपहर बाद आयोजित तैयारी बैठक में राम लीला आयोजन के निमंत्रण पत्र का विमोचन किया गया। तैयारी बैठक में आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए दायित्व निर्धारित किए गए। बैठक में अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी सहित समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा, संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल सहित कई वरिष्ठजन, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, युवा समाजसेवी उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता