जवाहर कला केन्द्र स्थापना दिवस समारोह में दिखी राजस्थान की लोक संस्कृति की झलक

 




जयपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। जवाहर कला केन्द्र के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह का शुक्रवार को रंगारंग समापन हुआ। अंतिम दिन रंगायन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह की शुरुआत वाद्य संगीत प्रस्तुति से हुई, जिसमें कलाकार ज़ेयान हुसैन एवं उनके दल ने वायलिन और बांसुरी वादन के माध्यम से सुरमयी वातावरण तैयार किया। इसके बाद राग खमाज की मध्य लय की बंदिश (ताल दीपचंदी, 14 मात्रा) प्रस्तुत की गई। साथ ही ‘ना मानूंगी’ छोटा ख्याल की प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। कार्यक्रम में तानों और झाला का प्रभावी जुगलबंदी संयोजन देखने को मिला। अंत में राग हंसध्वनि की प्रस्तुति के साथ वाद्य संगीत का समापन हुआ।

इसके पश्चात लोक नृत्य प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। अर्जुन एवं समूह ने पारंपरिक घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया। वहीं बिशनलाल एवं समूह ने शेखावटी क्षेत्र के प्रसिद्ध डेरू नृत्य की प्रस्तुति देकर लोक जीवन की झलक प्रस्तुत की। इसके बाद उर्मिला कुमारी एवं समूह ने ग्रामीण भवाई नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसमें कलाकारों ने सिर पर मटके रखकर संतुलन और लय के साथ अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।

समापन समारोह में बाल कलाकारों की प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण रहीं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और ऊर्जा से सभी का मन मोह लिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत लोक विधाओं ने गुरु-शिष्य परंपरा और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

कार्यक्रम के समापन पर कला एवं संस्कृति विभाग की शासन उप सचिव एवं जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगिया ने कहा कि समारोह का मुख्य आकर्षण बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राजस्थान की पारंपरिक लोक विधाएँ रहीं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तुतियों ने केन्द्र की नवाचारी सोच और गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त रूप में अभिव्यक्त किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि बाल कलाकारों की प्रतिभा, ऊर्जा और लोक परंपराओं की गहरी समझ यह सिद्ध करती है कि नई पीढ़ी के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश