14 सितंबर को खुलेगा राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव का पिटारा

 


जयपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव का मतदान पूरा होने के बाद अब राजनीतिक दलों की निगाहें 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम सामने आने के साथ ही शहरी मतदाताओं के रुझान की तस्वीर साफ होगी। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए। पहले चरण में नौ सितंबर को 162 नगरीय निकायों में 76.42 प्रतिशत मतदान हुआ। इस चरण में 57,52,278 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 43,95,853 ने मतदान किया। पहले चरण में चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल थीं। प्रतापगढ़ जिले की अरनोद नगरपालिका में सर्वाधिक 91.98 प्रतिशत और भीलवाड़ा नगर निगम में सबसे कम 63.84 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 नगरीय निकायों में मतदान हुआ। इसमें छह नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगरपालिकाएं शामिल थीं। इस चरण में 87,63,595 मतदाता मतदान के पात्र थे और 61,93,865 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अंतिम आंकड़े के अनुसार मतदान प्रतिशत 70.68 रहा। बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगरपालिका में सर्वाधिक 91.59 प्रतिशत, जबकि सिरोही नगर परिषद में सबसे कम 62.03 प्रतिशत मतदान हुआ।

दोनों चरणों को मिलाकर प्रदेश में औसत मतदान 72.95 प्रतिशत रहा। इस तरह पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में मतदान प्रतिशत कम रहा, लेकिन पूरे चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी पिछले आम चुनावों के मुकाबले अधिक रही। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 196 नगरीय निकायों के आम चुनाव में 70.31 प्रतिशत मतदान हुआ था।

अब 14 सितंबर को होने वाली मतगणना से यह स्पष्ट होगा कि शहरी क्षेत्रों में किस दल को बढ़त मिली। भारतीय जनता पार्टी के लिए ये चुनाव सरकार के कामकाज और संगठन की जमीनी पकड़ को परखने का अवसर हैं। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों के साथ राज्य सरकार की उपलब्धियों को भी चुनावी विमर्श में रखा है। मजबूत प्रदर्शन को सरकार और संगठन के पक्ष में शहरी मतदाताओं के समर्थन के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं आने पर स्थानीय स्तर के मुद्दों और जनसुविधाओं से जुड़े सवालों पर पार्टी को आत्ममंथन करना पड़ सकता है।

कांग्रेस के लिए भी ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं। विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष के तौर पर पार्टी की स्थानीय स्तर पर सक्रियता और संगठन की स्थिति का आकलन इन परिणामों से होगा। निकायों में बेहतर प्रदर्शन पार्टी को राजनीतिक रूप से मजबूती दे सकता है, जबकि कमजोर प्रदर्शन स्थानीय नेतृत्व और संगठन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर सकता है।

हालांकि चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वागड़ क्षेत्र में भारतीय आदिवासी पार्टी, मत्स्य क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी, मारवाड़ में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और शेखावाटी में माकपा की मौजूदगी पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। कुछ क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी भी मैदान में है।

निकाय चुनाव के परिणामों में कम मतों के अंतर से होने वाली जीत-हार और निर्दलीय प्रत्याशियों की स्थिति कई निकायों में बोर्ड गठन के समीकरण प्रभावित कर सकती है। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, वहां निर्दलीय और अन्य दलों के निर्वाचित पार्षदों की भूमिका बढ़ सकती है।

मतदान पूरा होने के बाद प्रशासन का पूरा ध्यान अब मतगणना की तैयारियों पर है। 14 सितंबर को दोनों चरणों में हुए मतदान की मतगणना होगी। इसके साथ ही यह तस्वीर साफ होगी कि किस दल को कितने निकायों में बहुमत मिला और किन निकायों में बोर्ड गठन के लिए दूसरे दलों या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित