एआई आधारित साइबर ठगी से सतर्क रहें, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
जयपुर, 20 मई (हि.स.)। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अब गुगल जैमिनी, चैटजीपीटी और ग्राेक जैसी एआई तकनीकों का उपयोग कर आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने की कोशिश कर रहे हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों का आधार नंबर, फोटो और मोबाइल संबंधी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर या अपडेट क्लाइंट लाइट किट के दुरुपयोग से आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर बदलने के बाद ओटीपी अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं, जिससे वे पीड़ितों के डिजिटल अकाउंट्स पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। अपराधी एआई आधारित डीपफेक तकनीक की मदद से ऐसे नकली वीडियो भी तैयार कर सकते हैं, जिनमें व्यक्ति के चेहरे के भाव और आंखों की गतिविधियां वास्तविक लगती हैं। कई बार आधुनिक फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी इन्हें असली मान लेते हैं।
एडीजी वीके सिंह ने कहा कि इसके बाद अपराधी डीजी लाॅकर, ई-केवाईसी और बैंकिंग सेवाओं का दुरुपयोग कर फर्जी खाते खोल सकते हैं तथा अवैध लेनदेन कर सकते हैं। राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपने आधार बायोमेट्रिक्स को एम आधार ऐप या यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से लॉक करने की अपील की है। पुलिस के अनुसार बायोमेट्रिक्स लॉक होने पर फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा का उपयोग तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक स्वयं उपयोगकर्ता उसे अनलॉक न करे। पुलिस ने आमजन को नियमित रूप से यूआईडीएआई पोर्टल पर जाकर आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री जांचने की सलाह भी दी है, ताकि पिछले छह महीनों में आधार का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से हुआ, इसकी जानकारी मिल सके।
वीके सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट या बदलाव का कोई अनचाहा एसएमएस प्राप्त होता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी है, ताकि किसी भी बदलाव की तत्काल जानकारी नोटिफिकेशन के जरिए मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश