राजस्थान के सात नगर निगमों में महापौर का फैसला, भाजपा छह और कांग्रेस एक पर काबिज
जयपुर, 21 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान के 10 नगर निगमों में से सात में सोमवार को महापौर पद का फैसला हो गया। पांच नगर निगमों अजमेर, अलवर, बीकानेर, उदयपुर और पाली में पार्षदों ने मतदान किया, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। सात निगमों में भाजपा ने छह और कांग्रेस ने एक महापौर पद हासिल किया। जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा।
अजमेर में भाजपा ने 32 से बढ़कर 43 वोट हासिल किए
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 पार्षद हैं। 80 सदस्यीय निगम में बहुमत का आंकड़ा 41 है। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा ने कांग्रेस की किरण गढ़वाल को हराकर महापौर पद हासिल किया। अनामिका शर्मा को 43 और किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले।
पाली में कांग्रेस के अधिक पार्षद, महापौर भाजपा का
पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद हैं। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत का आंकड़ा 33 है। भाजपा की नमिता बुबकिया महापौर निर्वाचित हुईं। उन्हें 33 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुमित्रा जैन को तीन और कांग्रेस की बागी निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को अपने 21 पार्षदों से 12 अधिक वोट मिले। वहीं कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद उसकी अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन वोट मिले।
अलवर में भी बहुमत के बिना भाजपा की सुमनलता अग्रवाल महापौर
अलवर नगर निगम में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23, निर्दलीय 13 और बसपा का एक पार्षद है। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की कमलेश शर्मा को हराया। सुमनलता अग्रवाल को 42 और कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।
भाजपा प्रत्याशी को अपने 28 पार्षदों से 14 अधिक वोट मिले।
उदयपुर में भाजपा का स्पष्ट बहुमत
उदयपुर नगर निगम में भाजपा के 53, कांग्रेस के 23 और अन्य चार पार्षद हैं। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा पहले ही बहुमत में थी। भाजपा के पारस सिंघवी ने कांग्रेस की डॉ. पूनम कुंवर को हराया। सिंघवी को 55 और पूनम कुंवर को 25 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को अपने पार्षदों की संख्या से दो अधिक वोट मिले।
बीकानेर में कांग्रेस का बहुमत कायम
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और आरएलपी का एक पार्षद है। 80 सदस्यीय निगम में बहुमत का आंकड़ा 41 है। कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को हराकर महापौर पद हासिल किया। कल्ला को 50 और शेखावत को 30 वोट मिले। कांग्रेस ने अपने 42 पार्षदों के साथ पहले से मौजूद बहुमत को महापौर चुनाव में भी बरकरार रखा।
भरतपुर और भीलवाड़ा में निर्विरोध महापौर
भरतपुर नगर निगम में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध महापौर चुनी गईं। 65 सदस्यीय निगम में 36 निर्दलीय, 20 भाजपा, सात कांग्रेस, एक बसपा और एक आरएलपी पार्षद हैं। नाम वापसी के बाद अनुराधा सिंह अकेली उम्मीदवार रह गईं और उनका निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इसी प्रकार भीलवाड़ा में भाजपा की जसवंत कंवर भी निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी हैं। 70 सदस्यीय निगम में भाजपा के 45, कांग्रेस के 10 और निर्दलीय 15 पार्षद हैं। यहां भी मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
सात निगमों में भाजपा छह, कांग्रेस एक
इस तरह सात नगर निगमों में भाजपा ने छह महापौर पद हासिल किए। भाजपा की ओर से अजमेर में अनामिका शर्मा, अलवर में सुमनलता अग्रवाल, उदयपुर में पारस सिंघवी, पाली में नमिता बुबकिया, भरतपुर में अनुराधा सिंह और भीलवाड़ा में जसवंत कंवर महापौर बनीं। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला महापौर निर्वाचित हुए। इनमें अजमेर, अलवर और पाली तीन ऐसे निगम रहे जहां भाजपा के पास वार्ड चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत नहीं था, लेकिन महापौर चुनाव में पार्टी के प्रत्याशियों ने बहुमत का आंकड़ा हासिल किया। अजमेर में भाजपा 32 से 43, अलवर में 28 से 42 और पाली में 21 से 33 वोट तक पहुंची। उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के पास पहले से स्पष्ट बहुमत था, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के पास बहुमत था। भरतपुर में किसी दल के पास बहुमत नहीं था, फिर भी भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध महापौर निर्वाचित हुईं।
अब जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर पद का फैसला बाकी है। इन तीनों नगर निगमों के महापौर चुनाव 25 सितंबर को होंगे। इसके साथ ही राज्य के सभी 10 नगर निगमों के महापौर पदों की तस्वीर साफ हो जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित