विदेशी संगठनों से मुलाकात और विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग पर राहुल गांधी जवाब दें: मदन राठौड़

 


जयपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से विदेशी संगठनों के साथ बैठकों, कथित समझौतों और विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।

राठौड़ ने कहा कि 10 जनपथ पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई मुलाकात का उद्देश्य, एजेंडा और चर्चा के विषय सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस संगठन का कांग्रेस, राहुल गांधी के कार्यालय या इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के साथ कोई समझौता है। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो कांग्रेस को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विरोध-प्रदर्शनों को मिलने वाली कथित विदेशी आर्थिक सहायता के स्रोत, स्वरूप और उद्देश्य की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित समाचार पत्रिका की एक रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और इंडियन अलायंस पेरिस का उल्लेख किया गया है। राठौड़ ने इन संगठनों के कथित संबंधों और गतिविधियों को लेकर सवाल उठाते हुए कांग्रेस से स्पष्ट करने को कहा कि क्या उसका संबंध उनके बताए गए ‘रेड-ग्रीन इकोसिस्टम’ से है, जिसमें उनके अनुसार वामपंथी और इस्लामिस्ट समूह शामिल हैं।

राठौड़ ने कांग्रेस नेतृत्व से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ वर्ष 2008 में हुए समझौते के उद्देश्य, विषयों और प्रतिबद्धताओं के बारे में भी जानकारी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विदेशी संगठनों के साथ राजनीतिक संपर्क और संभावित समझौतों को लेकर पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान, कानून और जनता के जनादेश से संचालित होता है। संसद, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

राठौड़ ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों का समाधान देश की संसद, न्यायपालिका, संवैधानिक व्यवस्था और जनता के जनादेश के माध्यम से होना चाहिए। किसी विदेशी संगठन को भारतीय राजनीति पर अनुचित प्रभाव डालने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हितों, देश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश