पुष्कर मेला 2026: घुड़सवारी पर्यटन से पुष्कर को मिलेंगे नए पंख

 


अजमेर, 14 जुलाई(हि.स.)। आगामी पुष्कर मेला 2026 की तैयारियों को लेकर पशुपालन विभाग पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है। विभाग ने मेले के भव्य और सफल आयोजन के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन कर उन्हें उनके दायित्व सौंप दिए हैं। इस वर्ष पुष्कर मेले में पर्यटन के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित करने के उद्देश्य से घुड़सवारी ( इक्वेस्ट्रियन ट्यूरिज्म) की अपार संभावनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू कर दी गई है। पुष्कर मेला 2026, 17 नवंबर 2026 से 24 नवंबर 2026 तक आयोजित होना प्रस्तावित है, यह सात दिनों तक चलने वाला आयोजन है, इसमें प्रारंभ में पुष्कर पशु मेला होता है फिर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मेला चलता है। जिसका मुख्य आध्यात्मिक पुष्कर सरोवर स्नान एवं ब्रह्मा जी के दर्शन का अवसर और समापन का दिन (कार्तिक पूर्णिमा) 23 या 24 नवंबर को होगा।

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि पुष्कर की रेतीली व सूखी मिट्टी घोड़ों के लिए अत्यंत आरामदायक और स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है। यह भौगोलिक परिवेश ठीक उसी प्रकार का है जैसा कि खाड़ी देशों में पाया जाता है, जहां अरबी घोड़ों को पालना एक बेहद प्रतिष्ठित शौक है। वे लंबी दूरी की रेसों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। पुष्कर का यह वातावरण घोड़ों के लिए सर्वाेत्तम सिद्ध हो रहा है। इसी के मद्देनजर, वर्षभर पर्यटकों को आकर्षित करने और उनका ठहराव सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की लंबी दूरी की एंडोरेंस राइड और जिमखाना रेस आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न घुड़सवारी प्रतियोगिताओं और एंडोरेंस राइड के लिए जजिंग कमेटी के अंतरराष्ट्रीय निर्णायक कर्नल सर प्रताप सिंह एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने पुष्कर का विस्तृत दौरा किया गया। टीम द्वारा मोतीसर रोड स्थित हेलीपैड, नजदीकी ग्राम मोतीसर व पिचोलिया की गोचर भूमि, वन विभाग के क्षेत्र और अरावली पर्वतमाला के आसपास के ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया गया। टीम ने इस ट्रैक को अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार पूरी तरह उपयुक्त पाया। गल्फ कंट्रीज की तर्ज पर पुष्कर में घुड़सवारी को बढ़ावा देने से मुख्य पर्यटन सीजन के अलावा भी पूरे वर्ष पर्यटकों का आवागमन बना रहेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बल मिलेगा।

मैदानी प्रतियोगिताओं के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. परिहार ने बताया कि पुराने मेला मैदान के स्टेडियम को रोमांचकारी प्रतियोगिताओं के लिए चिन्हित किया गया है। यहाँ पर्यटकों और दर्शकों को रोमांचित करने के लिए जिमखाना रेस, बैरल रेस, ट्रिक राइडिंग, टेंट पेगिंग, शो जंपिंग सहित अन्य हैरतअंगेज प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। इस पूरे ट्रैक को अंतिम रूप से तय करने की समय-सीमा 20 जुलाई निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि पुष्कर की धरती पर प्रकृति ने घोड़ों के अनुकूल बेहतरीन माहौल दिया है। घुड़सवारी खेल और पर्यटन को एकीकृत कर नए आयाम स्थापित करने से राजस्थान के पर्यटन उद्योग के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगा। इससे स्थानीय युवाओं और अश्वपालकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

निरीक्षण के दौरान कर्नल सर प्रताप सिंह की टीम के साथ इक्वेस्ट्रियन एसोसिएशन के राघवेंद्र सिंह ढूंढलोद, फिरोज खान, दक्ष सिंह एवं क्षेत्र के अन्य प्रतिष्ठित अश्वपालक और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष