जयपुर में पल्मो क्रिटिकोन आयोजन में पल्मोनोलॉजी व क्रिटिकल केयर में उन्नत तकनीकों पर हुआ मंथन
जयपुर, 19 अप्रैल (हि.स.)। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर की ओर से दो दिवसीय ‘पल्मो क्रिटिकोन 2026’ का सफल आयोजन किया गया। पिंकसिटी में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर क्षेत्र के विशेषज्ञों तथा जनरल प्रैक्टिशनर्स ने भाग लेकर उन्नत चिकित्सा ज्ञान साझा किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक सत्रों के साथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग को भी शामिल किया गया, जिससे श्वसन एवं क्रिटिकल केयर चिकित्सा में क्लिनिकल दक्षता को मजबूत करने पर जोर रहा।
सम्मेलन के पहले दिन का आयोजन होटल क्लार्क्स आमेर जयपुर में हुआ, जहां विशेषज्ञों ने विभिन्न अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की। सत्रों में सीओपीडी और हृदय रोगों के बीच संबंध, गंभीर अस्थमा में बायोलॉजिक्स की प्रगति, निमोनिया का प्रभावी प्रबंधन, तथा ईसीएमओ और एंटीबायोटिक स्टूवर्डशिप जैसी आधुनिक क्रिटिकल केयर तकनीकों पर विशेष फोकस रहा। विशेषज्ञों ने प्रमाण-आधारित उपचार पद्धतियों और व्यावहारिक अनुभवों पर जोर देते हुए चिकित्सकों को बेहतर निर्णय क्षमता विकसित करने के सुझाव दिए।
दूसरे दिन का आयोजन फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर में किया गया, जहां प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन लर्निंग के जरिए उन्नत प्रक्रियात्मक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें थोरैसिक अल्ट्रासाउंड, ब्रोंकोस्कोपी, ईबीयूएस और एयरवे इंटरवेंशन जैसी आधुनिक तकनीकों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन शामिल रहा। साथ ही लंग ट्रांसप्लांट प्रोटोकॉल, मेडियास्टाइनल डायग्नोस्टिक्स और जटिल एयरवे स्थितियों के प्रबंधन पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए।
सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. अंकित बंसल एवं सेक्रेटरी डॉ. विनोद शर्मा (कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी) ने बताया कि ‘पल्मो क्रिटिकोन 2026’ का उद्देश्य उन्नत पल्मोनोलॉजी प्रथाओं और प्राथमिक चिकित्सा के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने कहा कि पहले दिन जहां विशेषज्ञों ने ज्ञान साझा किया, वहीं दूसरे दिन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सकों के आत्मविश्वास को बढ़ाया गया, जो बेहतर मरीज परिणामों के लिए जरूरी है।
डॉ. ध्रुवा चौधरी (वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, पीजीआईएमएस रोहतक) ने कहा कि श्वसन रोगों का बढ़ता बोझ बहु-विषयक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण की मांग करता है तथा ऐसे मंच चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
डॉ. मनोज कुमार गोयल (प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम) ने कहा कि पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं और इस तरह के शैक्षणिक मंच चिकित्सकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने में सहायक होते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश