राजस्थान विधानसभा में उठा निजी बसों की हड़ताल का मामला

 


जयपुर, 26 फरवरी (हि.स.)। प्रदेश में तीन दिन से जारी निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल का मुद्दा गुरुवार को राजस्थान विधानसभा में उठा। कांग्रेस विधायक शिखा मील बराला ने शून्यकाल में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हड़ताल के कारण आमजन बेहाल हैं।

उन्होंने कहा कि एक बस से करीब 10 लोगों को रोजगार मिलता है। 35 हजार बसों के बंद होने से लगभग साढ़े तीन लाख लोग प्रभावित हुए हैं। होली का त्योहार नजदीक है, मजदूर अपने घर नहीं जा पा रहे, मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे। खाटूश्यामजी मेले में दूसरे राज्यों से आए हजारों लोग जयपुर में फंसे हुए हैं। टैक्सी चालक 70 किलोमीटर के लिए 7 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं।

शिखा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि लोग भारी सामान उठाकर बेबसी में खड़े हैं, यह बोझ उनका नहीं बल्कि सरकार की अकर्मण्यता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी बस ऑपरेटरों से ठोस वार्ता करने के बजाय केवल प्रधानमंत्री की प्रस्तावित रैली के लिए बसों की व्यवस्था को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि पहले 23 मांगें थीं, फिर 14 और अब 9 मांगों पर बात आ गई है, ऐसे में सरकार को समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने वन इंडिया-वन टैक्स की मांग का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब वन नेशन-वन इलेक्शन और वन नेशन-वन आधार की बात होती है तो परिवहन क्षेत्र में समानता क्यों नहीं?

निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि सामान्य दिनों में 35 हजार निजी बसें संचालित होती हैं, जबकि अभी केवल 33 प्रतिशत बसें चल रही हैं। छोटी गाड़ियों पर कैरियर लगाने पर भारी चालान किए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।

इधर हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर हड़ताल समर्थकों ने कई निजी बसों को रुकवाया। कुछ स्थानों पर ड्राइवर-कंडक्टर के साथ धक्का-मुक्की की गई और जूतों की माला पहनाने की घटनाएं भी सामने आईं। अलवर में ऑपरेटरों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया, जबकि बीकानेर के नापासर क्षेत्र में परीक्षा केंद्र तक बस नहीं मिलने से छात्राएं रोती नजर आईं।

निजी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सहमति नहीं देती, हड़ताल जारी रहेगी। उनका दावा है कि बसों के बंद रहने से सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। टोल के रूप में सरकार को प्रति किलोमीटर लगभग 5 रुपये की आय होती है, जो फिलहाल बंद है। इसके अलावा डीजल पर मिलने वाले वैट का भी नुकसान हो रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर