वन्य जीव गणना एक मई को, पहली बार युवतियों और महिलाओं को शामिल करेगा वन विभाग, देंगे प्रशिक्षण
चित्तौड़गढ़, 17 अप्रैल (हि.स.)। जिले में हर वर्ष की तरह इस बार भी वन्य जीव गणना का आयोजन किया जाएगा 1 मई को पूर्णिमा के अवसर पर शुरू होकर, दो मई सुबह तक चलेगा। जिले में यह गणना बस्सी सेंचुरी और सीता माता अभ्यारण्य के चिन्हित वाटर हॉल्स पर की जाएगी। इस बार वन विभाग नवाचार कर रहा है तथा महिलाएं व युवतियों को भी वन्य जीव गणना में मौका मिलेगा। वन्य जीव संरक्षण में रुचि रखने वाली महिलाएं व युवतियां इसके लिए संपर्क कर सकती है। इसके अलावा सीनियर कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी बुलाया जाएगा।
उप वन संरक्षक (वन्य जीव) मृदुला सिंह ने बताया कि इस बार की वन्यजीव गणना को और अधिक सहभागी और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए विशेष नवाचार किए जा रहे हैं। कॉलेज और स्कूल के वन्य जीव प्रेमी छात्र-छात्राओं को भी इसमें शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें उन्हें वन्य जीव गणना की प्रक्रिया और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी जाएगा। वे इस अनुभव से अधिकतम सीख सकें। इस बार की सबसे खास पहल यह है कि बालिकाओं को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मृदुला सिंह ने कहा कि कई बालिकाओं में वन्य जीवों को करीब से जानने और समझने की उत्सुकता होती है। ऐसे में उन्हें यह अवसर प्रदान किया जा रहा है। उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला वनकर्मियों की टीम उनके साथ रहेगी। उन्होंने इसे बालिकाओं के लिए वन्य जीवों के बारे में सीखने और प्रकृति से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। उप वन संरक्षक ने साथ ही वन्य जीव प्रेमियों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन से भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया है, जिससे वन संरक्षण के प्रति जागरूकता को और मजबूत किया जा सके।
ट्रेप कैमरों में मूवमेंट ज्यादा, चिन्हित किए जा रहे वॉटर हॉल
उप वन संरक्षक वन्य जीव मृदुला सिंह ने बताया कि जिले के बस्सी एवं सीतामाता सेंचुरी में अब तक वन्य जीव गणना होती आई है। लेकिन इस बार वन्य जीव गणना के लिए पैटर्न बदला गया है। गत दिनों दोनों सेंचुरी में कैमरे लगाए गए थे। इन ट्रेप केमरे में जहां वन्य जीवों का मूवमेंट अधिक है उन क्षेत्रों में वाटर हॉल को चिन्हित किया जाएगा। वैसे तो पूरे क्षेत्र को कवर करने का प्रयास होगा। नियमानुसार प्रत्येक 10 किलोमीटर पर एक वाटर हॉल होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल