प्रीमेच्योर जन्मे नवजात के पेट में थे पांच छेद; फिर भी जीती जिंदगी की जंग
अजमेर, 6 नवम्बर(हि.सं.)। राजस्थान के अजमेर स्थित तीर्थराज पुष्कर क्षेत्र की एक प्रसूता के साढ़े छह माह में जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक मेल चाइल्ड ने पूरे ढाई माह तक जिंदगी की जंग लड़कर आखिर जीत हासिल की। जन्म के समय मात्र साढ़े नौ सौ ग्राम वजन वाले इस नवजात को आज जब अपनी मां की गोद नसीब हुई तो उसका वजन एक किलो नौ सौ ग्राम हो चुका है और उसके सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं। जन्म के समय नवजात के पेट में पांच छेद थे और उसकी आंतें पर्याप्त रक्त आपूर्ति नहीं होने के कारण काली पड़ी चुकी थी। नवजात को जन्म के नौ दिन बाद ही पेट की जटिल सर्जरी का सामना करना पड़ा था।
चिकित्सा जगत में इस तरह की पैदाइश दुर्लभ मामलों की श्रेणी में मानी जा रही है; इससे भी ज्यादा जटिल और जोखिमपूर्ण ऐसे नवजात का उपचार कर जीवन बचा पाना। भारत में ऐसे मामले आज तक 15 से ज्यादा संज्ञान में नहीं हैं। चिकित्सकों के अनुसार अजमेर संभाग में तो अभी तक ऐसा कोई मामला संज्ञान में आया ही नहीं।
मित्तल हॉस्पिटल के सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ अदिति सिंह राव, नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ रोमेश गौतम, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ रोहिताश शर्मा और डीएनबी डॉक्टर, एनआईसीयू व ऑपरेशन थियेटर की पूरी टीम की मेहनत, निष्ठा, समर्पण भाव और परिवारजनों का धैर्य नवजात की जिंदगी बचाए रखने में सहायक बना।
सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ अदिति सिंह राव ने बताया कि प्रसूता को गंभीर अवस्था में मित्तल हॉस्पिटल लाया गया था। प्रसूता के तब 27 सप्ताह पर पानी छूट गया था। ऐसे में गर्भ में पल रहे बच्चे के जीवन का संकट खड़ा हो जाता है, लिहाजा प्रसूता को आवश्यक इंजेक्शन लगाए गए। जिससे पेट में पल रहे बच्चे को फेफड़े, श्वास और दिमागी रूप से कोई परेशानी ना हो। अगले ही दिन आपात स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी किए जाने पर प्रसूता ने एक लड़की और एक लड़के को जन्म दिया।
सीनियर नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ रोमेश गौतम ने बताया कि प्रसूता से जन्मे दोनों बच्चों फीमेल चाइल्ड और मेल चाइल्ड को नियमित प्रोटोकॉल के तहत जांचा गया। फीमेल चाइल्ड को कोई तकलीफ नहीं थी। जन्म के नौवें दिन मेल चाइल्ड का पेट फूलने लगा। जांच में पता चला कि उसके पेट में छेद है। बच्चे के जीवन की रक्षा के लिए उसे तुरंत सर्जरी की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता से परिवारजनों को अवगत कराया गया। उन्हें सभी तरह के जोखिम की पूरी जानकारी दी गई। हॉस्पिटल के एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ रोहिताश शर्मा जिन्हें इस तरह के जटिल एवं जोखिमपूर्ण मामलों को संभालने में दक्षता प्राप्त है उनसे परामर्श किया गया और सर्जरी प्लान की गई।
डॉ रोहिताश ने बताया कि 27 सप्ताह में जन्में 9 दिन के बच्चे को जिसका वजन ही 900 ग्राम से 950 ग्राम के आस पास है, उसे हाथ में पकड़ना भी मुश्किल और चुनौती भरा होता है। ऐसे में नवजात को एनेस्थीसिया देना एवं उसे वेंटीलेटर सपोर्ट पर रख कर उसकी सर्जरी करना व सर्जरी के बाद उसे वापस होश में लाना अपने आप में बेहद जटिल और दुर्लभ है।
उन्होंने कहा कि ऐसा मौका उनके जीवन में आया जिसमें सफलता मिलने पर वे परमशक्ति का शुक्रिया करते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ रोमेश गौतम के साथ पूरे टीम भावना से सभी ने इस चुनौती का सामना किया। आज परिणाम आपके सामने है जब दोनों बच्चों को स्वस्थ अवस्था में माता पिता को सौंपा गया और घर के लिए छुट्टी दी जा रही है।
नवजात के पिता ने मित्तल हॉस्पिटल के चिकित्सकों एवं समस्त स्टाफ की टीम भावना, यहां की चिकित्सा सेवा और सुविधाओं की खुले मन से सराहना की। उन्होंने दोनों ही बच्चों के स्वस्थ अवस्था में दीपावली पर अपने घर ले जाने पर अत्यंत ही प्रसन्नता व्यक्त की और
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष