पुलिस मुख्यालय में रेंज समीक्षा बैठक में डीजीपी ने अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, तकनीकी नवाचार और जनसुनवाई पर दिए निर्देश

 




जयपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। पुलिस मुख्यालय में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय रेंज समीक्षा बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा की गई। मुख्यालय के सभागार में 6 घंटे से अधिक समय तक चली इस मैराथन बैठक में अपराध नियंत्रण, नवाचारों के क्रियान्वयन और पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए रेंजवार प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान जिलों द्वारा किए जा रहे अनूठे प्रयासों को साझा करते हुए बेहतर पुलिसिंग का रोडमैप तैयार किया गया।

बैठक के दौरान गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर जोर दिया गया। डीजीपी ने एनडीपीएस, गैंगस्टर्स और हार्डकोर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन (वित्तीय जांच) को अनिवार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर उनके अटैचमेंट की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही 5 साल से अधिक पुराने लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए एडीसी क्राइम द्वारा जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

पुराने और चिन्हित हार्डकोर अपराधियों, हिस्ट्रीशीटर और आदतन द्वारा बार-बार किए जाने वाले अपराधों पर नाराजगी जताई गई और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करें और उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्यवाही अमल में लाएं ताकि वे अपराध न करने पाए।

आमजन को तकनीक का सीधा लाभ पहुँचाने के लिए डीजीपी ने राजकॉप सिटीजन एप के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के अधिकारी पृथक एप बनाने के स्थान पर अपने आइडिया मुख्यालय को भेजें ताकि उन्हें मुख्य एप ( राजकॉप सिटीजन एप) में ही समाहित किया जा सके।

डीजीपी ने थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता और नियमित रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने के साथ-साथ डिटेक्शन, चालानी प्रतिशत और रिकवरी में स्तर को सुधारने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में जयपुर रेंज की 'लेन ड्राइविंग' व्यवस्था को विस्तार देने के निर्देश दिए गए। टोल प्लाजा पर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास किए जाएंगे। थानों के 'स्वागत कक्षों' को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वहां कंप्यूटर, सीसीटीएनएस और ऑनलाइन एंट्री की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इससे परिवादियों की प्रविष्टि तत्काल डिजिटल माध्यम से हो सकेगी और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।

बैठक में महिला अत्याचार और एससी/एसटी एक्ट से संबंधित प्रकरणों में अनुसंधान की गुणवत्ता पर चर्चा हुई। डीजीपी ने निर्देश दिए कि झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार धारा 182/211 के तहत प्रभावी कार्रवाई कर इस्तगासा पेश किया जाए।

बैठक दौरान मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप दस वर्ष से अधिक सेवा वाले अधिकारियों द्वारा गोद लेने पर चर्चा की गई। इस दौरान जोधपुर पुलिस आयुक्तालय द्वारा थाना गोद लेने बाबत एक विशेष प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस अभिनव योजना का उद्देश्य थानों की कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार, संसाधनों का कुशल प्रबंधन और पुलिस-पब्लिक समन्वय को और अधिक प्रगाढ़ करना है। महानिदेशक पुलिस ने इस नवाचार की सराहना करते हुए अन्य अधिकारियों को भी अपने क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी बदलाव लाने और नवीन प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

बैठक में डीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय अग्रवाल, डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल, डीजी स्पेशल ऑपरेशंस आनंद श्रीवास्तव सहित विभिन्न प्रभागों के अतिरिक्त महानिदेशकों ने अपने-अपने प्रभागों से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की और पुलिसिंग के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश