कृषि विश्वविद्यालय में बनी पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक ‘प्लांट टिश्यू कल्चर लैब’

 


बागवानी की बदलेगी तस्वीर, अनार, अंजीर और कैक्टस के तैयार होंगे रोगमुक्त क्लोनल पौधे

जोधपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। थार के शुष्क अंचल में तेजी से बढ़ रहे बागवानी क्षेत्र के बीच उन्नत पौध सामग्री की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर राहत की बड़ी खबर लेकर आया है।

दरअसल गुणवत्ता युक्त पौध सामग्री की समस्या से निजात पाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने पहल करते हुए कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत के मार्गदर्शन में पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक प्लांट टिश्यू कल्चर लैब (पादप उत्तक संवर्धन प्रयोगशाला) को स्थापित किया है। जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के वित्तिय सहयोग से बनी इस लैब में कम समय में अनार, कैक्टस, अंजीर व औषधीय फसलों की रोगमुक्त क्लोनल पौध तैयार होगी, जिससे स्थानीय किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

लैब के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ प्रदीप पगारिया ने बताया कि लैब का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता युक्त पौध सामग्री तैयार करना है। उन्होंने बताया कि उत्तक संवर्धन एक आधुनिक तकनीक है जिसमें किसी पौधे के छोटे से हिस्से (जड़, तना, पत्ती) या कोशिकाओं के माध्यम से पौधा विकसित किया जाता है। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला में नियंत्रित तापमान और जीवाणुरहित (स्टेरलाइज्ड) वातावरण में कृत्रिम माध्यम में नए पौधे तैयार किए जाएंगे। लैब में तैयार होने के कारण यह पौधे वायरस और बीमारियों से भी मुक्त होते हैं। साल के किसी भी समय पौधे तैयार किया जा सकते हैं। मौसम का इंतजार नहीं करना पड़ता एवं दुर्लभ पौधों को बचाने में भी यह तकनीक सहायक है।

यहां मुख्य रूप से वायरस और कीट-मुक्त उच्च गुणवत्ता वाली पौध का बड़े पैमाने पर तीव्र उत्पादन (माइक्रोप्रोपैगेशन), बागवानी फसलों की गुणवत्ता युक्त पौध सामग्री, विलुप्तप्राय व औषधीय प्रजातियों का संरक्षण और आनुवंशिक रूप से शुद्ध क्लोन विकसित करने का कार्य होगा। इसके अलावा, पश्चिमी राजस्थान की जलवायु के अनुकूल सूखा एवं लवणता रोधी नई किस्मों के विकास पर शोध और क्षेत्रीय किसानों को बेहतर गुणवत्ता की पौध उपलब्ध कराने की दिशा में भी यहां निरंतर काम किया जाएगा।

कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत ने बताया कि इस आधुनिक कृषि में जैव प्रौद्योगिकी और टिश्यू कल्चर तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रयोगशाला के माध्यम से कम समय में रोगमुक्त, उच्च गुणवत्ता वाले और उन्नत किस्मों के क्लोनल पौधे तैयार किए जा सकेंगे। उन्होंने जोर दिया कि पश्चिमी राजस्थान की शुष्क जलवायु के अनुकूल बागवानी फसलों सहित औषधीय पौधों की गुणवत्ता सुधारने में यह लैब मील का पत्थर साबित होगी। इसका सीधा लाभ क्षेत्र के किसानों को उन्नत पौध सामग्री के रूप में मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश