राजस्थान को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में उद्योगों के अनुरूप तैयार होंगे युवा

 


जयपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान को देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने की दिशा में अब तकनीकी शिक्षा संस्थानों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों से निकलने वाले युवाओं को केवल डिग्री या डिप्लोमा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक कौशल देकर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी उद्देश्य से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों को मजबूत बनाने, आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने और विद्यार्थियों के बेहतर वेतन पैकेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

शासन सचिवालय में शुक्रवार को राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और औद्योगिक निवेश से पैदा होने वाली रोजगार संभावनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में जोधपुर, अजमेर, कोटा, अलवर, भरतपुर, सीकर, बीकानेर और जयपुर सहित दस राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अपने संस्थानों की स्थिति, तकनीकी शाखाओं, आधारभूत सुविधाओं, विद्यार्थियों के नियोजन, नवाचारों और भविष्य की कार्ययोजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान में औद्योगिक निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में उद्योगों को कुशल तकनीकी कार्मिकों और प्रशिक्षित श्रमिकों की निरंतर आवश्यकता होगी। इस मांग को पूरा करने में पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाने, शिक्षकों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण करने पर जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार और आकर्षक वेतन पैकेज दिलाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।

तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए महाविद्यालयों और औद्योगिक इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने नियमित कार्यशालाएं, औद्योगिक भ्रमण, तकनीकी संवाद और सेमिनार आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थी उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझ सकें।

नई तकनीकों पर विशेष सत्र आयोजित करने से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा और वे नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। इसके साथ ही पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के बीच शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी जताई गई।

राजस्थान में तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने के लिए कम से कम पांच उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इनके विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी पीएसयू के साथ समन्वय स्थापित कर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया। ऐसे केंद्रों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण और उद्योग आधारित कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा) कुलदीप रांका ने बताया कि राजस्थान में वर्तमान में 68 राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय संचालित हैं। राज्य सरकार इन संस्थानों में विद्यार्थियों की प्रवेश संख्या बढ़ाने और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जयपुर में तीन और जोधपुर में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जोधपुर और बीकानेर में एक-एक और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित