पीआईएमएस अपग्रेडेशन के चलते जेडीए में नई बीएसआर लागू होने में देरी

 


जयपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएमएस) के अपग्रेडेशन का कार्य जारी है, जिसके चलते नई बेसिक शेड्यूल रेट्स (बीएसआर) को लागू करने में देरी हो रही है। इस अपग्रेडेशन पर जेडीए करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जिसमें सिस्टम को अपडेट करने के साथ तीन वर्षों तक उसके मेंटेनेंस की व्यवस्था भी शामिल है।

आईटी विभाग के सिस्टम एनालिस्ट महिपाल सिंह चम्पावत के अनुसार पीआईएमएस को आधुनिक बनाने का कार्य फरवरी माह से शुरू किया गया है और इसे अगले 4 से 6 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सिस्टम के अपग्रेड होने के बाद विकास कार्यों से जुड़े टेंडर, स्वीकृतियां और अन्य प्रक्रियाएं अधिक तेज, पारदर्शी और सरल हो जाएंगी।

वर्तमान में नई बीएसआर को ऑनलाइन लागू नहीं किया जा सका है, क्योंकि इसे पीआईएमएस से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। जैसे ही सिस्टम अपडेट होगा, नई बीएसआर को भी ऑनलाइन लागू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि सरकार ने 29 दिसंबर 2025 को नई बीएसआर जारी की थी, जिसे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) सहित अन्य विभाग पहले ही लागू कर चुके हैं, लेकिन जेडीए अभी भी वर्ष 2022 की बीएसआर के आधार पर कार्य कर रहा है।

नई बीएसआर लागू होने से जेडीए को आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिलने की संभावना है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2022 की बीएसआर में 11 केवी एचटी केबल की दर 1904 रुपये प्रति मीटर थी, जो 2025 की बीएसआर में घटकर लगभग 1755 रुपये रह गई है। इसी प्रकार 33 केवी एचटी केबल की दर 3959 रुपये से घटकर 3092 रुपये हो गई है। वहीं कुछ मदों में वृद्धि भी देखी गई है, जैसे 500 केवी ट्रांसफार्मर की कीमत 16.66 लाख रुपये से बढ़कर 17.32 लाख रुपये हो गई है। इसके अलावा 120 वॉट की स्ट्रीट लाइट की दर 8723 रुपये से घटकर 7020 रुपये हो गई है।

सूत्रों के अनुसार नई बीएसआर लागू नहीं होने से ठेकेदारों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि अन्य विभाग नई दरों पर काम कर रहे हैं, जबकि जेडीए में पुरानी दरें लागू होने से असमानता की स्थिति बन रही है।

यह भी उल्लेखनीय है कि जेडीए ने 2022 की बीएसआर को लागू करने में लगभग तीन वर्ष का समय लिया था। इसे 2025 में स्वायत्त शासन विभाग के निर्देशों के बाद लागू किया गया था। ऐसे में अब नई बीएसआर लागू करने में हो रही देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

विभागीय सूत्रों का मानना है कि बीएसआर में देरी और पुरानी दरों पर काम होने से गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ती हैं। हाल ही में जेडीए ने इंजीनियरिंग विंग के छह अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में नोटिस भी जारी किए हैं। इसके अलावा सड़कों के पेचवर्क और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं, विशेषकर बारिश के दौरान घटिया निर्माण कार्य उजागर हुए हैं।

इस संबंध में जेडीए के डायरेक्टर (इंजीनियर) देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि पीआईएमएस अपग्रेडेशन का कार्य प्रगति पर है और इसमें अभी लगभग छह माह का समय लग सकता है। इसके पूरा होने के बाद ही नई बीएसआर को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई बीएसआर पहले ही स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन उसे तकनीकी रूप से लागू करने के लिए सिस्टम अपडेट आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश