फड़ चित्रकला में जीवंत हुई हल्दीघाटी की गाथा, विवेक जोशी ने उकेरा महाराणा प्रताप का शौर्य
भीलवाड़ा, 12 जून (हि.स.)। महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शाहपुरा की विश्वप्रसिद्ध फड़ चित्रकला में हल्दीघाटी की ऐतिहासिक गाथा को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। युवा फड़ कलाकार विवेक जोशी ने अपनी नवीन कृति में महाराणा प्रताप के शौर्य, चेतक की स्वामीभक्ति और हल्दीघाटी युद्ध के प्रमुख प्रसंगों को पारंपरिक शैली में जीवंत किया है।
विवेक जोशी देश के प्रख्यात फड़ चित्रकार स्वर्गीय शांति लाल जोशी के पुत्र हैं। शांति लाल जोशी को राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। शाहपुरा में सात सौ वर्षों से निवासरत उनका परिवार फड़ चित्रकला की परंपरा को संरक्षित और विकसित करता आ रहा है। परिवार की इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए विवेक के भाई विजय जोशी को भी राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त हो चुका है। उनकी एक कलाकृति राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेंट की गई थी।
विवेक जोशी ने बताया कि उनकी नई फड़ चित्रकारी में हल्दीघाटी युद्ध की घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से दर्शाया गया है। चित्र की शुरुआत आमेर के राजा मानसिंह और महाराणा प्रताप के बीच हुए विवाद के प्रसंग से होती है। इसके बाद हल्दीघाटी के युद्ध का दृश्य चित्रित किया गया है, जिसमें एक ओर महाराणा प्रताप अपनी सेना के साथ और दूसरी ओर मुगल सेना के साथ मानसिंह दिखाई देते हैं।
फड़ में युद्ध का वह ऐतिहासिक क्षण भी दर्शाया गया है, जब महाराणा प्रताप ने भाले से मानसिंह पर प्रहार किया था। साथ ही चेतक के घायल होने और अपने स्वामी को सुरक्षित निकालकर दर्रा पार कराने के मार्मिक प्रसंग को भी प्रमुखता से उकेरा गया है। चित्र में महाराणा प्रताप के भाई शक्ति सिंह का भावनात्मक दृश्य भी शामिल है, जिसमें वे युद्ध के दौरान अपने भाई की स्थिति देखकर पश्चाताप करते हुए उनसे मिलते हैं।
विवेक जोशी ने बताया कि इससे पहले वे हल्दीघाटी युद्ध पर 5 गुणा 12 फीट की विशाल फड़ चित्रकारी भी तैयार कर चुके हैं। उनका उद्देश्य फड़ कला के माध्यम से नई पीढ़ी को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, लोक परंपराओं और वीरता की गाथाओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि शाहपुरा की फड़ कला सदियों से लोकदेवताओं, ऐतिहासिक घटनाओं और लोककथाओं को चित्रों के माध्यम से जीवंत करती रही है। उनकी यह नई कृति भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इतिहास और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद