मोबाइल में सेव निजी डेटा से हो सकती है साइबर ठगी

 


जयपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने स्मार्टफोन में निजी और संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखने को लेकर आमजन के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है।

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी इस सलाह में कहा गया है कि आज स्मार्टफोन केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, निजी दस्तावेजों और डिजिटल पहचान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे में फोन में संवेदनशील जानकारी असुरक्षित तरीके से रखना साइबर ठगी, पहचान चोरी और आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने बताया कि हाल के बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से स्पष्ट है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 61 प्रतिशत लोग अपने निजी दस्तावेज, 60 प्रतिशत फोटो-वीडियो, 48 प्रतिशत ऑफिस ई-मेल, 38 प्रतिशत बैंकिंग जानकारी, 37 प्रतिशत एआई चैट हिस्ट्री और 34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड मोबाइल फोन में ही सेव रखते हैं। भारत में प्रतिदिन 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले दर्ज किए जाते हैं, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।

पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी मुख्य रूप से पहचान चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और कॉरपोरेट जासूसी जैसे अपराधों के लिए आधार, पैन, बैंकिंग ऐप, यूपीआई, निजी फोटो-वीडियो और गोपनीय दस्तावेजों को निशाना बनाते हैं।

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग कार्य नहीं करने, फोन में स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन सक्रिय रखने, ऐप्स को केवल आवश्यक अनुमति देने, महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंकिंग ऐप्स को सिक्योर फोल्डर में रखने, क्लाउड बैकअप को मजबूत पासवर्ड एवं टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करने तथा केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करने की अपील की है।

पुलिस ने कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल, हेल्पलाइन अथवा राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश