सप्त शक्ति कमांड और बिट्स पिलानी के बीच अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार हेतु रणनीतिक साझेदारी
जयपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। स्वदेशी रक्षा आधुनिकीकरण और‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमांड और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स), पिलानी ने साेमवार को अनुसंधान एवं विकास तथा तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
जन संपर्क अधिकारी (रक्षा) जयपुर (राजस्थान) ले कर्नल निखिल धवन के अनुसार यह समझौता जयपुर स्थित सप्त शक्ति कमांड मुख्यालय में लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमांड तथा बिट्स पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव द्वारा औपचारिक रूप से संपन्न हुआ। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य उभरती सैन्य परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अकादमिक विशेषज्ञता को एकीकृत करना तथा आधुनिक युद्धक्षेत्र की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार-प्रधान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।
यह समझौता ज्ञापन सहयोग एवं समन्वय के लिए एक सुदृढ़ ढांचा स्थापित करता है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप स्वदेशी नवाचारों को प्रोत्साहित करेगा। इसका लक्ष्य सप्त शक्ति कमांड की विशिष्ट भौगोलिक एवं परिचालन चुनौतियों के अनुरूप स्वदेशी समाधान विकसित करना है। इस समझौते के अंतर्गत शैक्षणिक कार्यक्रमों, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं एवं विशेष कार्यशालाओं तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सप्त शक्ति कमांड के मानव संसाधन को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाया जा सके। सप्त शक्ति कमांड के समृद्ध परिचालन अनुभव और बिट्स पिलानी की तकनीकी विशेषज्ञता के समन्वय से आधुनिक युद्धक्षेत्र की तकनीकी आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सकेगा।
बिट्स पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने कहा कि संस्थान सदैव इंजीनियरिंग उत्कृष्टता में अग्रणी रहा है और यह समझौता राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सप्त शक्ति कमांड की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान क्षमताओं को संरेखित कर बिट्स पिलानी स्वदेशी एवं प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य में भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए तकनीकी रूप से उन्नत और स्वदेशी समाधान अनिवार्य हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिट्स पिलानी की विशेषज्ञता भारतीय सेना की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप अकादमिक अनुसंधान को दिशा प्रदान करेगी तथा‘विकसित भारत 2047’के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव