पारस सिंघवी होंगे उदयपुर नगर निगम के महापौर, प्रत्याशी के रूप में भरा नामांकन

 


उदयपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। उदयपुर नगर निगम के महापौर चुनाव को लेकर मचे सियासी घमासान और अंतिम पलों की खींचतान पर आखिरकार विराम लग गया। भाजपा में दिग्गजों के बीच टिकट को लेकर चली जद्दोजहद के बाद संगठन की सहमति से पारस सिंघवी को महापौर पद का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।

चूंकि उदयपुर नगर निगम के कुल 80 वार्डों में से भाजपा ने 53 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है, ऐसे में पारस सिंघवी का महापौर बनना तय माना जा रहा है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ की पत्नी पूनम कुंवर को अपना उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को औपचारिक रूप दिया है।

उदयपुर नगर निगम के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब नामांकन के अंतिम दो घंटों में भाजपा को अपने महापौर पद के प्रत्याशी का नाम तय करना पड़ा। इस बार आधा दर्जन से अधिक दिग्गज चेहरों के मैदान में होने के कारण पार्टी के भीतर जबरदस्त ऊहापोह देखने को मिली।

भाजपा खेमे में दोपहर तक दिनेश भट्ट, प्रमोद सामर, अतुल चंडालिया और महेन्द्र सिंह शेखावत जैसे दावेदारों के नामों को लेकर चर्चा चलती रही। पार्टी सूत्रों की मानें तो शहर विधायक ताराचंद जैन और कटारिया गुट दिनेश भट्ट के समर्थन में अड़े हुए थे, जबकि जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह और अन्य पदाधिकारी प्रमोद सामर के नाम पर जोर दे रहे थे। दोनों प्रमुख गुटों के बीच आपसी सहमति न बन पाने से पार्टी में गतिरोध पैदा हो गया। इस बीच, बताया जा रहा है कि आरएसएस और संगठन की रणनीति के तहत पारस सिंघवी के नाम पर मुहर लगी। नामांकन दाखिल करने के दौरान पारस सिंघवी काफी भावुक नजर आए। उनके नामांकन में वार्ड-74 के पार्षद पंकज बोराणा प्रस्तावक बने। नामांकन के दौरान जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा सहित पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत, पूर्व महापौर रजनी डांगी, चंद्रसिंह कोठारी और गोविन्द सिंह टांक भी उपस्थित थे।

महापौर पद की रेस से इतर, अब ब्राह्मण चेहरे के संतुलन को साधने के लिए दिनेश भट्ट को उपमहापौर (डिप्टी मेयर) पद का ऑफर दिए जाने की चर्चा है। यदि वह इस पर राजी नहीं होते हैं, तो विकल्प के रूप में अशोक नागदा, कविता जोशी या जतिन श्रीमाली को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

कांग्रेस पार्टी की ओर से महापौर पद की प्रत्याशी पूनम कुंवर ने नामांकन दाखिल करने के बाद तीखे तेवर दिखाए। बहुमत नहीं होने के बावजूद उन्होंने फिर दावा किया कि इस बार कांग्रेस उदयपुर में अपना बोर्ड बनाएगी और भाजपा के पिछले 30 सालों के भ्रष्टाचार को खत्म कर जनता के हितों के लिए कार्य करेगी।

पारस सिंघवी के महापौर पद के लिए तय होने के बाद उनके वार्ड और धानमण्डी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी हर्ष का माहौल है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नगर निगम प्रांगण में एकत्र हुए और यो कई वैइग्यो, पारस अई ग्यो के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं में यह भी चर्चा रही कि मंडी से जो जाएगा—महापौर कहलाएगा का नारा आखिरकार सच साबित हुआ।

उधर, स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा के भीतर मची कलह शहरभर में चर्चा का विषय बनी रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नामांकन स्थल के बाहर सुबह से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता