ओज़ोन परत पृथ्वी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच, इसके संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी : प्रो. सुब्रतो दत्ता

 


अजमेर, 16 सितम्बर(हि.सं.)। अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा रिमोट सेंसिंग विभाग एवं भूगोल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में पर्यावरण विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, भूगोल, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं शिक्षा विभाग की कुल 21 टीमों के 63 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में ओज़ोन परत संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, सतत विकास तथा समसामयिक पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति वैज्ञानिक समझ एवं जागरूकता विकसित करना था। विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े विषयों पर अपनी समझ और ज्ञान प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

प्रतियोगिता में वनस्पति विज्ञान विभाग की टीम वंशिका, तनिष्का एवं नीलम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान पर्यावरण विज्ञान विभाग की टीम साक्षी, यशस्वी एवं तन्मय ने हासिल किया, जबकि रिमोट सेंसिंग विभाग की टीम अंशुल, दीपक एवं जयदीप तृतीय स्थान पर रही।

इस अवसर पर पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि ओज़ोन परत पृथ्वी का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक समझ के साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल नीतियों और सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से ही प्रभावी रूप से संभव है।

पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण माथुर ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को वैश्विक पर्यावरणीय सहयोग की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम विश्व स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के संयोजक एवं संचालनकर्ता डॉ. रौनक चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और जागरुकता विकसित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ओज़ोन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और सतत विकास जैसे विषय केवल अकादमिक विमर्श तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव कल्याण और पृथ्वी के भविष्य से सीधे जुड़े हैं।

अतिथि शिक्षिका निवेदिता शर्मा ने कहा कि पर्यावरणीय शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े छोटे-छोटे व्यवहारिक कदम अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास से जुड़े विषयों पर नियमित रूप से शिक्षण एवं जन-जागरुकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। रिमोट सेंसिंग विभाग भू-स्थानिक तकनीकों, उपग्रह आंकड़ों एवं पृथ्वी अवलोकन के माध्यम से पर्यावरणीय परिवर्तनों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वहीं भूगोल विभाग मानव-पर्यावरण संबंधों, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं क्षेत्रीय पर्यावरणीय समस्याओं के अध्ययन के माध्यम से पर्यावरणीय जागरुकता को बढ़ावा दे रहा है।

कार्यक्रम में डॉ. फिरोज़ खान, डॉ. शुभ्रा सिंह, कौशल रूपावत, कोमल नोगिया, मैना थोलिया एवं धवन कुमार सहित शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में विजेता टीमों को बधाई देते हुए सभी प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता एवं उत्साह की सराहना की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष