छात्रहितों की मांगों को लेकर एनएसयूआई और एबीवीपी का प्रदर्शन

 


जोधपुर, 27 जून (हि.स.)। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में शनिवार को एनएसयूआई और एबीवीपी ने छात्रहितों की मांगों को लेकर अलग-अलग प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। उनकी बढ़ी हुई फीस वृद्धि वापस लेने सहित विभिन्न मांगे थी।

एनएसयूआई के शहर जिलाध्यक्ष डॉ. बबलू सोलंकी ने बताया कि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए लगभग 35 फीसदी तक फीस वृद्धि की गई है, जबकि राजभवन के निर्देशानुसार अधिकतम 10 प्रतिशत फीस वृद्धि ही अनुमन्य है। ज्ञापन में विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई 35 प्रतिशत फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लेते हुए केवल 10 प्रतिशत फीस वृद्धि ही लागू करने की मांग की गई। साथ ही जिन विद्यार्थियों ने बढ़ी हुई फीस जमा कर दी है, उनसे ली गई अतिरिक्त राशि आगामी 15 दिनों के भीतर उनके बैंक खातों में वापस लौटाई जाने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय द्वारा प्रथम मेरिट सूची में चयनित विद्यार्थियों को फीस जमा कराने के लिए मात्र एक दिन का समय दिया गया, जो अत्यंत अपर्याप्त है। इसलिए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय मेरिट सूची में चयनित सभी विद्यार्थियों को फीस जमा कराने हेतु कम से कम तीन दिन का समय प्रदान किया जाए। साथ ही जो विद्यार्थी निर्धारित समय में फीस जमा नहीं कर पाए हैं उन्हें भी पुन: तीन दिन का विशेष अवसर प्रदान किया जाए, ताकि कोई भी विद्यार्थी केवल समयाभाव के कारण प्रवेश से वंचित न रहे।

एनएसयूआई ने गुटों में बंटकर किया प्रदर्शन

इस दौरान एनएसयूआई में गुटबाजी भी नजर आई। एनएसयूआई के पदाधिकारी और छात्र नेता अलग-अलग गुटों में प्रदर्शन करने विश्वविद्यालय पहुंचे। एक गुट में जिला अध्यक्ष डॉ. बबलू सोलंकी के नेतृत्व में कार्यकर्ता पहुंचे, वहीं दूसरे गुट में छात्र नेता एमएल चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ता पहुंचे। इस गुटबाजी को लेकर जिला अध्यक्ष बबलू सोलंकी ने कहा कि यह संगठन के अंदर का मामला है, जिसे मिल बैठकर सुलझा लिया जाएगा।

एबीवीपी की उग्र आंदोलन की चेतावनी

वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा भी जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पर मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। बाद में उन्होंने भी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी के छात्र नेता मोती सिंह जोधा ने बताया कि यह सही निर्णय नहीं है। पहले तो छात्रों पर अत्याधिक भार डाला गया है। हर साल शुल्क बढ़ोतरी हो रही है। इस बार तो चालीस फीसदी फीस सबके लिए भारी है। इतना ही नहीं फीस भरने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया है। भारी भरकम फीस का प्रबंधन करने के लिए सूची जारी होने के 24 घंटें में प्रबंधन करना छात्रों के लिए आसान नहीं होता है, जबकि विश्वविद्यालय ने आवेदन के लिए एक माह का समय दिया था। हमारी मांग है कि फीस को कम कर भरने का समय बढ़ाया जाए। इसको लेकर हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश