प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता: कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास

 


बीकानेर, 19 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केन्द्र, नोहर द्वारा आयोजित खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र के लिए अनिवार्य 15 दिवसीय प्रमाणपत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में प्राकृतिक खेती की मॉडल इकाई का उद्घाटन भी किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि प्रशिक्षित उर्वरक विक्रेता किसानों तक वैज्ञानिक एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए किसानों तक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों के प्रसार पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि एवं निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण तथा वैधानिक प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करते हैं। उन्होंने वेटेनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों की भूमिका को किसानों और पशुपालक तक नवीन तकनीकों के प्रभावी प्रसार का सशक्त माध्यम बताया।

सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), रामप्रताप गोदारा ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, नोहर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद कांटवा ने प्रशिक्षण के उद्देश्य एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग किसानों के हित में करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. अशोक चौधरी ने प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 05 से 19 अगस्त 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैव एवं नैनो उर्वरक, गुणवत्ता नियंत्रण, अभिलेख संधारण तथा औद्योगिक भ्रमण सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। समापन अवसर पर सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. विक्रमजीत सिंह ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव