जयपुर में लगेगा 18 दिवसीय राष्ट्रीय सरस मेला, देशभर की ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों के लिए सजेंगी 800 दुकानें

 


जयपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने और उनके उत्पादों को नई पहचान दिलाने के लिए जयपुर में राष्ट्रीय सरस मेला 2026-27 आयोजित किया जाएगा। 25 दिसंबर 2026 से 11 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित इस 18 दिवसीय मेले में देश के विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने हाथों से तैयार उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगी। मेले में करीब 750 से 800 स्टॉल लगाने की योजना है। इसके अलावा खानपान के लगभग 50 स्टॉल, हस्तशिल्प निर्माण का सजीव प्रदर्शन, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आजीविका के अवसर बढ़ाने के प्रयासों के तहत इस आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल से मुलाकात की। बैठक में जयपुर में राष्ट्रीय सरस मेले के आयोजन और ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस मेले के लिए जवाहर कला केंद्र के दक्षिणी परिसर, शिल्पग्राम और इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान परिसर को प्रस्तावित स्थल के रूप में शामिल किया गया है। आयोजन के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

मेले में राजस्थान के साथ देश के अन्य राज्यों के स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पाद लेकर पहुंचेंगी। यहां हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाकृतियों और घरेलू स्तर पर तैयार विभिन्न वस्तुओं को प्रदर्शित करने तथा सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर के दम पर आमदनी बढ़ाने और नए ग्राहकों से जुड़ने का मंच मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सरस मेले का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है। आयोजन के दौरान क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों का प्रस्ताव भी है, जिनके माध्यम से महिला उद्यमियों को व्यापारियों और संभावित खरीदारों से संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

इससे स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए नियमित बाजार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

मेले में हस्तशिल्प निर्माण का सजीव प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। इससे लोग पारंपरिक उत्पादों को तैयार करने की कला को करीब से देख सकेंगे। कार्यशालाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण हुनर, लोक परंपराओं और देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी मंच मिलेगा। खानपान के लगभग 50 स्टॉल मेले में आने वाले लोगों के लिए अलग आकर्षण होंगे।

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए राजसखी ब्रांड के माध्यम से डिजिटल बाजार से जोड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे महिलाओं को पारंपरिक बिक्री केंद्रों से आगे बढ़कर ऑनलाइन माध्यमों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। बेहतर बाजार संपर्क मिलने पर ग्रामीण महिला उद्यमियों के उत्पादों की मांग बढ़ाने और उनकी आय के नए रास्ते खोलने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल के बीच बैठक में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जी राम जी की प्रगति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में ग्रामीण विकास और आजीविका से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

जयपुर में प्रस्तावित राष्ट्रीय सरस मेला ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और उद्यमशीलता को राष्ट्रीय मंच देने का अवसर बनेगा। यदि प्रस्तावित योजना के अनुरूप मेले का आयोजन होता है, तो यह महिला उद्यमियों को नए ग्राहकों, व्यापारिक संपर्कों और डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित