जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला 17 से, पोस्टर का विमोचन
जयपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, डीम्ड विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला के पोस्टर का विमोचन किया। विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान चिकित्सक प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर डीम्ड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में यह राष्ट्रीय कार्यशाला 17 एवं 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के सभागार में आयोजित की जाएगी।
कार्यशाला का विषय “जीवनशैलीगत विकारों में आयुर्वेद की भूमिका” रखा गया है। कार्यशाला में हृदय रोग, मधुमेह, यूरिनरी स्ट्रिक्चर एवं मूत्रवह संस्थानगत विकार, पीसीओडी, इनफर्टिलिटी सहित विभिन्न जीवनशैलीगत विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रायोगिक एवं अनुभूत जानकारी प्रदान की जाएगी।
पोस्टर विमोचन के अवसर पर कुलगुरु प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि “वर्तमान समय में जीवनशैलीगत विकार केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता इन विकारों को लगातार बढ़ा रहे हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल रोग के लक्षणों के उपचार तक सीमित न रहकर व्यक्ति की प्रकृति, आहार, विहार और जीवनशैली में आवश्यक सुधार के माध्यम से स्वास्थ्य की मूल अवधारणा को मजबूत करने की क्षमता रखता है। इसलिए जीवनशैलीगत विकारों की रोकथाम एवं समग्र प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की वैज्ञानिक परंपरा और आधुनिक अनुसंधान के समन्वय से जीवनशैलीगत विकारों के लिए अधिक प्रभावी, सुरक्षित, व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जा सकते हैं। ऐसी कार्यशालाएं चिकित्सकों को शास्त्रीय ज्ञान के साथ-साथ उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में आयुर्वेद की प्रासंगिकता तेजी से बढ़ रही है और चिकित्सकों को जीवनशैलीगत विकारों के समग्र प्रबंधन के लिए आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
प्रदेश महासचिव डॉ. पवन सिंह शेखावत ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य आयुर्वेद चिकित्सकों को जीवनशैलीगत विकारों के प्रबंधन की प्रायोगिक एवं क्लिनिकल जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने दैनिक चिकित्सकीय कार्य में इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान के साथ-साथ रोग प्रबंधन की व्यावहारिक एवं क्लिनिकल जानकारी साझा की जाएगी, जिससे प्रतिभागी चिकित्सकों को जीवनशैलीगत विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन में नवीन एवं उपयोगी दृष्टिकोण प्राप्त हो सकेगा।
इस अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर इकाई की अध्यक्ष प्रोफेसर सुमन शर्मा , प्रदेश कार्यकारणी सदस्य प्रोफेसर महेंद्र प्रजापति, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जयपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, तथा आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर इकाई की ओर से डॉ. ब्रह्मानंद उपस्थित रहे।
कार्यशाला के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पोस्टर विमोचन के साथ ही प्रारंभ कर दी गई है। आयोजकों ने कार्यशाला में देशभर से लगभग 500 आयुर्वेद चिकित्सकों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव