निकाय चुनाव: भाजपा-कांग्रेस ने साधे अपने—अपने बागी

 


उदयपुर, 03 सितंबर (हि.स.)। निकाय चुनाव में नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही उदयपुर नगर निगम में चुनावी तस्वीर साफ होने लगी है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस ने 12 बागियों के नामांकन वापसी का दावा किया तो वार्ड 24 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे भाजपा के बागी माने जा रहे चेतन कुमावत ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके मैदान में रहने से भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व उपमहापौर पारस सिंघवी को संभावित नुकसान की चर्चा थी। अब वार्ड 24 में भाजपा के पारस सिंघवी और कांग्रेस की दीपिका कुमावत के बीच सीधी टक्कर होगी।

नामांकन वापसी के अंतिम दिन दोपहर 3 बजे तक जिला कलेक्ट्रेट में प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने का सिलसिला चलता रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों को साधने के लिए संगठनात्मक स्तर पर प्रयास किए। दोनों दलों की ओर से बागी प्रत्याशियों को भविष्य में राजनीतिक अवसर देने और संगठन में उनकी भूमिका का ध्यान रखने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है।

कांग्रेस की ओर से उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी दिनेश औदिच्य ने बताया कि नगर निगम चुनाव से पहले पार्टी को बड़ी राहत मिली है। उनके अनुसार उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा के प्रयासों से कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस लिए हैं। मीणा ने सभी उम्मीदवारों से व्यक्तिगत संपर्क कर समझाइश की, जिसके बाद उम्मीदवारों ने कांग्रेस के साथ रहने और पार्टी को वोट देने का संकल्प लिया।

कांग्रेस के अनुसार नामांकन वापस लेने वालों में वार्ड नंबर 1 से रवि शर्मा, वार्ड नंबर 29 से गणेश चन्द्र शर्मा, वार्ड नंबर 39 से चन्द्र शेखर सांखला, वार्ड नंबर 33 से अशोक शाह, वार्ड नंबर 38 से बुशरा सुल्ताना और अखरोज बानो, वार्ड नंबर 45 से अजहर मोहम्मद मंसूरी, वार्ड नंबर 46 से दीपक मेनारिया, वार्ड नंबर 48 से प्रवीण नखरिया, वार्ड नंबर 68 से सीमा कुमारी प्रजापत तथा वार्ड नंबर 77 से शोभा लाल भील शामिल हैं।

कांग्रेस के अनुसार इन सभी उम्मीदवारों ने पार्टी के साथ रहने और कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने के लिए मिलकर काम करने की बात कही है। पार्टी इसे चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता और बागियों को मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में अहम सफलता के तौर पर देख रही है।

दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने बागी प्रत्याशियों को मनाने के लिए संगठन स्तर पर कवायद की। पार्टी में पर्यवेक्षकों के साथ नेताओं की टीम बागी प्रत्याशियों से संपर्क में रही। भाजपा की ओर से भी बागियों को भविष्य में अवसर देने और संगठन में उचित भूमिका देने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। वार्ड 24 में चेतन कुमावत का नामांकन वापस होना भाजपा के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि उनके निर्दलीय मैदान में रहने से भाजपा के वोटों के संभावित विभाजन की चर्चा थी।

नामांकन वापसी से पहले वार्ड 80 से हितेश कुमार प्रजापत, वार्ड 5 से प्रताप सिंह चौहान, वार्ड 61 से सुशीला सुथार, वार्ड 12 से राकेश सेन और दिनेश वसीटा, वार्ड 9 से रवि नलवाया, वार्ड 33 से अशोक कुमार शाह तथा वार्ड 14 से हर्ष वैष्णव ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरे नामांकन वापस लिए थे। इनमें रवि नलवाया को कांग्रेस का बागी प्रत्याशी बताया गया था।

नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों का फोकस चुनाव प्रचार पर है। शहर के लगभग सभी वार्डों में प्रत्याशियों ने चुनाव कार्यालय शुरू कर दिए हैं। कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों और चुनावी रणनीति बनाने का दौर चल रहा है। प्रत्याशी डोर-टू-डोर कैंपेन के जरिए मतदाताओं से सीधे संपर्क साध रहे हैं।

भाजपा अपने प्रचार में पिछले छह बोर्ड के विकास कार्यों को प्रमुखता से जनता के सामने रख रही है। वहीं कांग्रेस इन्हीं विकास कार्यों और शहर की मौजूदा व्यवस्थाओं को लेकर भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में नामांकन वापसी के बाद दोनों दलों के बीच चुनावी मुकाबला अब सीधे तौर पर संगठन, विकास और स्थानीय मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता दिखाई दे रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता